अंबेहटा। टिटौली गांव में तेंदुए की दहशत दूसरे दिन भी रही। हमले में घायल हुए चाचा-भतीजा को उपचार के बाद देर रात करनाल के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घर लौटने के बाद बातचीत करते हुए चाचा मशरूर ने बताया कि भतीजे की जिंदगी के सामने खुद की मौत का डर नहीं लगा। इसलिए निहत्था होने के बावजूद तेंदुए से भिड़ा और भतीजे को बचाया।
घटना की कहानी मशरूर की जुबानी :
मैं बुधवार को करीब पौने तीन बजे वह घर के बाहर ट्यूबवेल पर हाथ धो रहा था। वहां सात वर्षीय भतीजा हुसैन भी खेल रहा था, जब हाथ धोकर घर के अंदर जाने लगा तभी देखा कि एक तेंदुआ भतीजे को उठाकर ले जा रहा है। यह देखकर हाथ-पैर फूल गए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। वहां पड़ी ईंट उठाकर तेंदुए को मारी, लेकिन डर था कि कहीं भतीजे को ईंट न लग जाए। ऐसे में वह निहत्था ही तेंदुए के पीछे दौड़ पड़ा। करीब 200 मीटर तक दौड़ता रहा। खुद की मौत का भी डर था, लेकिन भतीजे की जिंदगी के सामने उसकी परवाह नहीं की। इसी दौरान तेंदुए ने भतीजे को छोड़ दिया और मुझ पर हमला कर दिया। तेंदुए ने मुंह पर प्रहार किया, लेकिन मैंने चेहरे के सामने हाथ कर अपना बचाव किया। ऐसे हालातों में भी हौसला नहीं खोया और तेंदुए के पंजे पकड़ लिए। कई मिनट तक ऐसे ही चलता रहा। इसके बाद तेंदुआ वहां से भाग गया।
बच्चे के मुंह पर लगे 15 से अधिक टांके
तेंदुए के हमले से बचकर निकला मासूम हुसैन अब भी सदमे में है। उसके चेहरे पर 15 से अधिक टांके लगे हैं। चेहरे और सिर पर पट्टी बंधी हुई है। जब उससे बात करने की कोशिश की तो सिर्फ अपना नाम ही बता सका। वह सदमे में भी है और जख्मी होने के कारण बोल भी नहीं पा रहा है।
ड्रोन कैमरे से की तलाश, लगाया पिंजरा
इस घटनाक्रम के बाद से ही गांव में वन विभाग और पुलिस की टीम सक्रिय है। वन विभाग की टीम ने ड्राेन कैमरे से भी खेतों में तेंदुए की तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चल सका। फिलहाल तेंदुए को पकड़ने के लिए खेतों में पिंजरा लगाया गया है। लोग खेतों की तरफ जाने से भी डर रहे हैं। बृहस्पतिवार को ग्रामीण इकट्ठा होकर खेतों में चारा लेने पहुंचे।