सहारनपुर। वुड कार्विंग के बाद जनपद में सबसे अधिक रोजगार देने वाला होजरी उद्योग प्रशिक्षित कारीगरों की कमी से जूझ रहा है। होजरी कारोबारी लगातार आईटीआई में होजरी से संबंधित कोर्स शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
जनपद में देश की आजादी से पहले से ही हाथ की मशीन से जुराबें बनाने का काम हो रहा है। यह कारोबार धीरे-धीरे बड़े उद्योग में शामिल हो गया। छोटी-बड़ी करीब 1000 इकाईयां हैं, इनका वार्षिक कारोबार लगभग 2000 हजार करोड़ रुपये के आसपास है।
इसके बावजूद होजरी उद्योग कई समस्याओं से जूझ रहा है। कारोबारी लंबे समय से न सिर्फ होजरी उद्योग के लिए कलस्टर और सीएफसी बनाने, बल्कि आईटीआई में होजरी उद्योग से संबंधित कोर्स शुरू करने की मांग कर रहे हैं, जिससे होजरी उद्योग को प्रशिक्षित कारीगर उपलब्ध हो सकें।
जिले का होजरी उद्योग प्रदेश में कानपुर के बाद दूसरे स्थान पर है। करीब एक से सवा लाख लोगों को इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में होजरी उद्योग को ओडीओपी में शामिल किया है।
होजरी उत्पादों की देश भर में सप्लाई
यहां से देश भर में होजरी उत्पादों की सप्लाई होती है। अधिकांश सप्लाई पूरे उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली और बिहार सहित उत्तर भारत के अन्य राज्यों में होती है। यहां पर होजरी के विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं। इनमें बनियान, जींस, इनरवियर, समीज, लोवर, टी शर्ट, कैपरी, बच्चों के सूट, जुराबें, सर्दियों के इनरवियर आदि शामिल हैं।
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बोले उद्यमी
यह उद्योग प्रशिक्षित कारीगरों की कमी से जूझ रहा है। इसके लिए संगठन लंबे समय से आईटीआई में होजरी से संबंधित कोर्स शुरू कराने की मांग कर रहा है, जिससे कारोबार को प्रशिक्षित कारीगर आसानी से उपलब्ध हो सकें। - घनश्याम माहेश्वरी, महासचिव, सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन
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प्रशिक्षित कारीगर होने से होजरी उद्योग तेजी से तरक्की करेगा। इससे न सिर्फ होजरी उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि निर्यात भी शुरू हो सकेगा। जनपद का होजरी कारोबार बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है। - अजमल, संगठन मंत्री, सहारनपुर होजरी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन