सहारनपुर में अश्व यानी घोड़ा प्रजाति के पशुओं में तेजी से फैल रही ग्लैंडर्स बीमारी मनुष्य जाति के लिए भी बेहद खतरनाक है। इसे लेकर शासन और प्रशासन स्तर पर अलर्ट जारी किया गया है। बीमारी से बचाव की जानकारी देने के लिए बुधवार को विकास भवन के सभागार में कार्यशाला आयोजित की गई।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि अश्व प्रजाति के पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए पशु चिकित्सा अधिकारियों को अश्व पालकों से संपर्क कर पशुओं के नमूने लेकर राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान संस्थान हिसार हरियाणा भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
ब्रुक इंडिया जो अश्व प्रजाति के पशुओं की देखभाल करती है, के प्रतिनिधि भी सर्वेक्षण एवं नमूना संग्रह करने में सहयोग करेंगे। ग्लैंडर्स बीमारी फारसी संक्रामक बीमारी है, जो पशुओं से मनुष्य में भी फैल सकती है।
विडंबना यह है कि अभी तक इस बीमारी से बचाव का कोई टीका उपलब्ध नहीं है। सहारनपुर में कुछ ही महीने पहले एक घोड़े में यह लक्षण पाए गए थे, जिसे यूथनाइज किया गया था।
यह मिलता है अनुदानः जिस भी पशु में बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं। उस पशु को यूथनाइज करने यानी मार देने का नियम है, जिससे यह बीमारी मनुष्य में न फैले। जिस भी पशु पालक के पशु को यूथनाइज किया जाता है उसे घोड़े के लिए 25 हजार और, गधे, टट्टू और खच्चर के लिए 16 हजार रुपये देने का प्रावधान है।