कॉल डिटेल से खुलेगी अवैैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की कुंडली
आरोपी पिता-पुत्रों ने कराई है बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की घुसपैठ
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एटीएस की कार्रवाई में पकड़े गए बांग्लादेशी पिता-पुत्र की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। जांच में अभी तक सामने आया है कि दोनों आरोपी बांग्लादेशियों और रोंहिग्या को सहारनपुर व वेस्ट यूपी में लाकर बसाते थे। दोनों किस-किस के संपर्क में रहे, कॉल डिटेल से इसका राज खुलेगा और अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों की गर्दन तक एटीएस का हाथ पहुंचेगा।
शुक्रवार को एटीएस ने थाना कुतुबशेर क्षेत्र से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी तनवीर और उसके पिता उमर मोहम्मद उस्मान को गिरफ्तार किया था, जो 1994 से सहारनपुर में ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे। इन्होंने भारतीय नागरिकता के तमाम दस्तावेज भी बनवाए हुए थे। इनके पास से बांग्लादेश की आईडी बरामद हुई है। एटीएस की जांच में सामने आ चुका है कि दोनों पिता-पुत्र बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को सहारनपुर लाने में मदद करते रहे। जनपद सहित वेस्ट यूपी में इन्होंने कई लोगों को अवैध रूप से लाकर बसाया, जिसके बदले प्रत्येक व्यक्ति से मोटी रकम वसूली।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक एटीएस ने आरोपियों के कब्जे से लिए सिम और मोबाइल फोन के आधार पर कॉल डिटेल खंगालना शुरू कर दिया है। पता लगाया जा रहा है कि किन-किन लोगों को सहारनपुर और वेस्ट यूपी के जिलों में लाकर बसाया। सीडीआर के एक नंबर की गहनता से जांच की जा रही है। एसपी सिटी राजेश कुमार का कहना है कि एटीएस लखनऊ द्वारा जांच की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर पर कार्रवाई होगी।
प्रत्येक व्यक्ति पर लेते थे 40 से 50 हजार
जांच में सामने आया है कि आरोपी पिता-पुत्र बांग्लादेशी नागरिक को भारत में लाकर बसाने का ठेका लेते थे। इसके बदल प्रति व्यक्ति 40 से 50 हजार रुपये लेते थे। सूत्र बताते हैं कि आरोपी भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र बनवाने में भी इनकी मदद करते थे। इसके बदले अलग से पैसा लिया जाता था।
मुर्शीद की हो रही तलाश
दोनों आरोपी हर तीन माह में ठिकाना बदलते थे। ये नदीम कॉलोनी, एकता विहार कॉलोनी, देवबंद, सरसावा, गंगोह में लंबे समय तक रहे। एटीएस ने इन्हें नदीम कॉलोनी से पकड़ने का दावा किया है, जबकि स्थानीय पुलिस इनके एकता विहार कॉलोनी में रहने की बात कह रही है। वहीं, चर्चा यह भी है कि दोनों किसी मीट फैक्टरी में काम करते थे। सीओ प्रथम चंद्र प्रकाश शर्मा का कहना है जिसके मकान में ये रहे हैं, उसके स्वामी का नाम मुर्शीद पता चला है, जिसकी तलाश कराई जा रही है।