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आम की फसल पर हॉपर कीट का प्रकोप

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सहारनपुर। जनपद में आम की फसल इस समय हॉपर कीट की चपेट में है। यह कीट आम के बौर से लेकर पेड़ की नई पत्तियों का भी रस चूसता है। इस कीट द्वारा छोड़े गए चिपचिपे पदार्थ से सूटी मोल्ड फंगस का प्रकोप बढ़ जाता है। जिससे न सिर्फ छोटे छोटे फल नीचे गिर जाते हैं बल्कि बड़े फलों की क्वालिटी भी खराब हो जाती है। इससे आम की फसल में 25 से 30 फीसदी का नुकसान होने की आशंका है।
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आम की फसल पर हॉपर जिसे स्थानीय भाषा में मच्छर या फुनगा भी कहा जाता है, का प्रकोप है। कीटनाशकों के कई बार छिडकाव के बावजूद भी इस कीट पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पाया है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि इस बार आम पर हॉपर कीट का प्रकोप काफी है। इस कीट पर नियंत्रण करने के लिए बागवान लाईट ट्रेप, नीम तेल, मित्र फफूंदी लेकानीसिलियम का प्रयोग कर सकते हैं। रसायनिक कीटनाशकों में मेलाथियान 50 ईसी दो मिलीलीटर या डाईमेथोएट एक मिलीलीटर, या ब्यूप्रोकेनजीन 25 ईसी दो मिलीलीटर या इमीडाक्लोप्रिड 70 प्रतिशत की 0.1 मिलीलीटर मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। छिडकाव से पहले कीटनाशक के साथ मैंकोजेब या जीनेब को भी मिला लें।
-गांव टोली के सत्यकुमार का कहना है कि इस बार आम पर हॉपर कीट का प्रकोप अधिक है। इससे न सिर्फ उत्पादन की विपरीत असर पडे़गा बल्कि आम की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।
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बेहट के बागवान पीके जैन ने बताया कि हॉपर कीट पर नियंत्रण के लिए आम के बाग में कीटनाशक का दो तीन छिड़काव करा चुके हैं। इससे फसल की लागत बढ गई है।
गांव फंदपुरी के बागवान महीपाल कहते हैं कि हॉपर कीट आम के बौर एवं कोमल पत्तियों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है। इस कीट द्वारा छोडा गया चिपचिपा पदार्थ बारिश के दिनों में आम को काला कर सकता है।
गांव ढकदेवी के बागवान अजय कुमार का कहना है कि हॉपर कीट इस बार लाइलाज साबित हो रहा है। इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो 25 से 30 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।
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