सहारनपुर। जनपद में साल दर साल एचआईवी के मरीज बढ़ रहे हैं। सबसे अधिक मरीज नकुड़, गंगोह, देवबंद और नानौता क्षेत्र के सामने आ रहे हैं। मरीजों की काउंसिलिंग में सामने आया है कि उन्होंने असुरक्षित संबंध बनाए। खास बात यह है कि बड़ों की गलती का खामियाजा बच्चे भी भुगत रहे हैं। करीब आठ बच्चे भी सामने आए हैं। अन्य लोग इस बीमारी की चपेट में न आएं, इसके लिए विभाग संबंधित क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों के माध्यम से जन जागरूकता लाने का प्रयास कर रहा है।
इस समय जिले में एचआईवी के कुल 2023 मरीज हैं। इनका नियमित इलाज एसबीडी जिला अस्पताल में बने एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी) सेंटर से चल रहा है। इनमें करीब 35 मरीज दूसरी स्टेज के हैं। इनका विशेष इलाज किया जा रहा है। जिला अस्पताल परिसर में एआरटी सेंटर की स्थापना वर्ष 2013-14 में की गई थी। इसके बाद से यहां लगातार मरीज पहुंच रहे हैं। शासन-प्रशासन और विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान के बावजूद एचआईवी मरीजों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। सबसे अधिक मरीज नकुड़, गंगोह, देवबंद और नानौता क्षेत्र से आ रहे हैं। शहर में थाना जनकपुरी क्षेत्र की एक कॉलोनी में ही करीब 40 मरीज हैं। एआरटी सेंटर के काउंसलर शिवकांत यादव ने बताया कि इन क्षेत्रों से प्रतिदिन कम से कम एक मरीज आने का औसत है। सभी क्षेत्रों में मरीजों की संख्या अधिक होने की वजह असुरक्षित यौन संबंध हैं। इस वजह से लोग एचआईवी संक्रमित हो रहे हैं। खास बात यह है कि मरीजों में आठ ऐसे बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र सात से आठ वर्ष है।
साल दर साल बढ़ रहे मरीज
वर्ष-------------मरीजों की संख्या
2015-------------289
2016-------------277
2017-------------322
2018-------------343
2019 में अभी तक 200 से अधिक
अस्पताल में दी जा रही यह चिकित्सा सुविधा
जिला अस्पताल में बने एआरटी सेंटर में एचआईवी की सभी जांचें पूरी तरह फ्री हैं। मरीजों के लिए ब्लड की 24 घंटे उपलब्धता है। खास बात यह है कि ब्लड पूरी तरह फ्री है। एचआईवी पॉजीटिव मिलने वाले मरीजों को इलाज के साथ ही काउंसिलिंग कर उसमें आत्मविश्वास लाया जाता है, जिससे कि वह निराशा की ओर न चला जाए।
एचआईवी की स्टेज और लक्षण
एचआईवी का पहला लक्षण दो से छह हफ्तों में दिखाई देने लगता है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम बिगड़ने लगता है। इसमें वायरल फ्लू की ही तरह लक्षण जैसे सिर दर्द, डायरिया, थकान, गले का सूखना, मांसपेशियों में दर्द, सूजन, छाती पर लाल रैशेज और बुखार महसूस होता है। दूसरी स्टेज में वायरल जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते और न ही उन्हें कोई बीमारी महसूस होती है। ऐसी अवस्था में हर वक्त थकान, गले के आसपास सूजन, 10 दिन से ज्यादा बुखार, रात में पसीना आना होता है। एचआईवी की एडवांस और आखिरी स्टेज को एड्स कहते हैं। शरीर में मौजूद सीडी-4 टी सेल्स का टेस्ट कराने पर जब सीडी-4टी सेल्स की संख्या 200 से भी कम होती है तो एड्स की अवस्था होती है। सामान्य व्यक्ति में सीडी-4 सेल्स की संख्या 500 से 1600 के बीच होती है।
एचआईवी के कारण
- एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति की सुई लगाने से।
- एचआईवी संक्रमित मरीज का खून स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाने से।
- संक्रमित महिला से पैदा होने वाले बच्चे को।
- संक्रमित महिला या पुरुष के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से।
- एचआईवी और एड्स में अंतर
एचआईवी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं पर हमला करता है, जबकि एड्स, एचआईवी संक्रमण के बाद सिंड्रोम के रुप में प्रकट होता हैं। एचआईवी होने का मतलब एड्स नहीं है। यदि कोई व्यक्ति एचआईवी संक्रमित है तो यह जरूरी नहीं कि उसे एड्स हुआ हो। डॉक्टरों का कहना है कि एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति नियमित रूप से दवाएं लेकर, डॉक्टर की सलाह से अच्छी डाइट अपनाकर और व्यायाम कर सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन जी सकता है।
एचआईवी मरीजों की संख्या बढ़ने की एक वजह लोगों में जागरूकता का अभाव है। लोगों को चाहिए कि वह असुरक्षित संबंध न बनाएं। खून चढ़वाने से पहले उसकी जांच करा लें। इस्तेमाल की हुई सिरिंज का इस्तेमाल न करें। यदि कोई आशंका है तो आधार कार्ड लेकर जांच कराने पहुंचें। हमारे पास पर्याप्त दवाएं और जांच की व्यवस्था है। हम मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज देने का प्रयास कर रहे हैं।
डॉक्टर आरके टंडन, नोडल अधिकारी, एआरटी सेंटर।