इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश राजेश दयाल खरे ने कहा कि एडीआर सेंटर खुलने से जनता को निश्चित ही लाभ होगा। सुलह समझौते से त्वरित और वैकल्पिक न्याय प्राप्त होगा, मगर इसके लिए लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी।
वह शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर के वीआईपी हॉल में आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस घर में महिलाओं का सम्मान न होता हो वह घर कभी बस नहीं सकता। जिला जज उमेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में खामियां हो सकती हैं, मगर वह ऐसी नहीं हैं, जिन्हें ठीक न किया जा सके। कहा कि लोगों को समय से न्याय मिल सके, इसके लिए मामलों को बेवजह लटकाना नहीं चाहिए।
खासकर समाज पर प्रभाव डालने वाले मामलों को शीघ्र निपटाने के प्रयास करने चाहिए। सिविल जज/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गौरव शर्मा ने सुलह समझौता केंद्र के कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले वर्ष 28 कैंप लगाए गए। 160 लोगों केे विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार ने कहा कि मध्यस्थता केंद्र के बनने से समाज को काफी फायदा हुआ है।
सहारनपुर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सत्यपाल सिंह सैनी, वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रह्मजीत शर्मा और एसी पपनेजा ने इन केंद्रों की उपयोगिता बताई। सचिव अनुराग गुप्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता बिशंबर सिंह पुंडीर ने सुलह समझौते के इतिहास और महत्व की जानकारी दी। बताया कि इसकी वजह से परिवार टूटने से बच जाते हैं। संचालन अपर जिला जज बबीता रानी ने किया।
इस दौरान न्यायिक अधिकारी ओपी त्रिपाठी, अमित पाल सिंह, मुकेश कुमार सिंघल, संजय कुमार, नरेंद्र बहादुर, ज्ञान प्रकाश, रविकांत, सभाजीत यादव, दीपा राय, बृजेंद्र कुमार पांडेय, रविंद्र कुमार, पारुल वर्मा, अजय कुमार, इलियास, रजनेश कुमार आदि रहे। इससे पहले न्यायाधीश राजेश दयाल खरे को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गोष्ठी से पहले उन्होंने वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र, कंप्यूटर विभाग के पूछताछ अनुभाग भवन और लाइब्रेरी का लोकार्पण किया।
1246 वाद निस्तारित हुए
सहारनपुर। सिविल कोर्ट परिसर में शनिवार को आयोजित मासिक राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें कुल 1246 वाद निस्तारित हुए आर 72605 रुपये का अर्थ दंड प्राप्त हुआ।
निस्तारित वादों में न्यायिक अधिकारी बबीता रानी ने एक, अमित पाल सिंह ने दो, मुकेश कुमार सिंघल ने 200, संजय कुमार ने एक, नरेंद्र बहादुर प्रसाद ने तीन, ज्ञान प्रकाश ने दो, रविकांत ने चार, सभाजीत यादव ने तीन, दीपा राय ने एक, बृजेंद्र कुमार पांडेय ने 512, गौरव शर्मा ने 20, रविंद्र कुमार ने 170, पारुल वर्मा ने नौ, अजय कुमार ने 56, डॉ. मोहम्मद इतयास ने 46, रजनेश कुमार ने छह, बीबी गर्ग ने आठ, रामनेत सिंह ने 93, सत्यपाल सिंह प्रेमी ने एक, एसडीएम सदर ने 35, सिटी मजिस्ट्रेट ने 73 तथा वोडाफोन व टाटा टेली की प्रीलिटिगेशन लोक अदालत में दस वाद निस्तारित हुए।