साथी हाथ बढ़ाना: हाशिमपुरा में सड़क निर्माण कार्य के लिए मिट्टी बिछाते ग्रामीण। स्रोत-ग्रामीण
देवबंद। विकास कार्यों के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के पोल खोलने के लिए हाशिमपुरा रजबहे के पास करीब 100 मीटर की सड़क ही काफी है। ग्रामीणों की एक अरसे से मांग के बावजूद सड़क का निर्माण तो दूर उसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से आहत ग्रामीणों ने अब खुद ही सड़क बनाने का जिम्मा उठाया है। इसके लिए चंदा इकट्ठा कर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया।
हाशिमपुरा गांव में एक कॉलोनी के लोग सड़क निर्माण के कार्य में जुटे हुए हैं। कमाल की बात ये है कि इस सड़क को बनाने में प्रशासन की ओर से एक भी रुपया नहीं लगाया गया है और न ही उनसे किसी तरह की मदद ली गई है। बल्कि ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर सड़क निर्माण कार्य शुरु किया है। ग्रामीण नूरहसन सुलेमान, नौशाद, सद्दाम, नूरा आदि ने बताया कि यह सड़क पिछले कई वर्षों से खराब हालत में है। इसमें पानी भरने की वजह से यह मार्ग चलने लायक नहीं रहता। प्रशासन और ग्राम प्रधान से अनेकों बार इसे ठीक कराने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इससे हताश होकर उन्होंने चंदा इकट्ठा कर खुद ही निर्माण कार्य आरंभ करा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इसमें प्रशासन या ग्राम प्रधान का कोई सहयोग नहीं है।
सड़क कार्य योजना में शामिल, शासन से नहीं आ रहा बजट : प्रधान
ग्राम प्रधान अब्दुल सत्तार ने बताया कि शासन से बजट नहीं आ रहा है। उक्त सड़क को कार्य योजना में भी चढ़वाया हुआ है। ग्रामीणों को इस संबंध में बताया भी गया, लेकिन वह गांव की पार्टी बाजी के चक्कर में उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। लोगों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की लिए टंकी का निर्माण कराया जा रहा है। जिसके लिए पाइप लाइन भी डाली जानी है। ग्रामीणों से कहा गया था कि वह फिलहाल नालियों को ठीक करा देते हैं। लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुए।