सहारनपुर में कई घोटाले उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अब अपने अधिकारियों को बचाने में जुट गया है। गाड़ियों के टेंडर में फर्जीवाड़े की जांच के बाद शासन ने पूर्व सीएमओ समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे लेकिन विभागीय अधिकारी एफआईआर दर्ज कराने से कतरा रहे हैं।
इनके अलावा महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब करने, बिना हस्ताक्षर के टेंडर पास करने के मामलों में विभाग के अधिकारी झुलसते नजर आ रहे हैं। बता दें कि मुख्य विकास अधिकारी की जांच में स्वास्थ्य विभाग में गाड़ियों के टेंडर में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है।
ब्लॉकों में स्वास्थ्य जांच के लिए जाने वाली गाड़ियों का टेंडर बिना अनुमोदन के ही कर दिया गया। इतना ही नहीं कागजों में गाड़ियां तो चार पहिया दिखायी गई लेकिन जिन गाड़ियों के नंबर अंकित किए गए, जांच में वे नंबर बाइकों और ट्रकों के पाए गए।
इस फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद शासन ने सीएमओ समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के आदेश दिये थे, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारी एफआइआर दर्ज नहीं करा सके।
सीएमओ डा. बलजीत सिंह सोढ़ी ने इस संदर्भ में शासन को पत्र लिखा है। जिसमें बताया गया है कि पूर्व सीएमओ का स्थानांतरण हो गया है। ऐसे में एफआईआर दर्ज करायी जाए या नहीं।
स्वाथ्य विभागीय अधिकारियों की निगाहें अब शासन के आदेश पर टिकी है। जनपद में करीब पांच दिनों तक रुकी ऑडिट टीम के बैरंग लौटने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की टेंशन बढ़ गई है।
ऑडिट टीम की रिपोर्ट शासन के समक्ष रखे जाने के बाद लखनऊ में बैठे आला अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। सूत्रों की मानें तो विभाग में पिछले दिनों हुए कई घोटालों की आंच में कई अधिकारी और कर्मचारी झुलसते नजर आ रहे है।