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वो नए दौर का बेटा है, खत में पिता ने हुक्म भी लिखा तो गुजारिश की तरह

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वो नए दौर का बेटा है, खत में पिता ने हुक्म भी लिखा तो गुजारिश की तरह
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सहारनपुर। ऑल इंडिया उर्दू तालिमी बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किताब पीर-ए-हिरात का विमोचन किया गया। इस दौरान मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों ने कलाम पेश कर समा बांध दिया।
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छत्ता जंबूदास स्थित जैन कन्या इंटर कॉलेज के सभागार में रविवार रात आयोजित कार्यक्रम में किताब पीर-ए-हिरात का विमोचन सांसद हाजी फजलुरर्हमान के पुत्र अल्तमश कुरैशी और मुशर्रफ खतीब सहारनपुरी ने किया। इसके पश्चात मुशायरे का आगाज आबिद हसन वफा सहरानपूरी ने नाते पाक से किया। लेखक ख्वाजा सलमान नासरी ने कहा कि किताब पीर-ए- हिरात में पांचवीं सदी के सूफी शायर अब्दुल्लाह अंसारी की जीवनी को उर्दू भाषा में प्रकाशित किया गया है। मुशायरे में आबिद हसन वफा सहारनपुरी ने कलाम पेश करते हुए कहा कि वो नए दौर का बेटा है, उसको खत में पिता ने हुक्म भी लिखा तो गुजारिश की तरह। मुशर्रफ खतीब ने कलाम पेश किया कि न मंजिल का पता, न रास्ते की खबर है, बोझल-बोझल कदमों का सफर है। मंसूर राणा ने कहा कि नजर से गिर गया है, पर तेरी आदत नहीं बदली, तेरा लहजा बताता है, तेरी फितरत नहीं बदली। आसिफ शम्सी सहारनपुरी ने कहा कि बेटा मेरा बुजुर्ग की मय्यत से लौटकर, मुझसे लिपट के रोने लगा मुझे देखकर। अंजुम सहारनपुरी ने कहा कि सबको अंजुम नजर में रखकर, हर कोई पारसा नहीं होता। मुशायरे की अध्यक्षता इस्लामिया इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य प्रोफेसर जलाल उमर और संचालन डाक्टर शाहिद जुबैरी ने किया। कार्यक्रम के समापन पर उर्दु तालिमी बोर्ड के महासचिव दानिश सिद्दीकी ने सभी का आभार जताया। इस दौरान मजहर उमर, ख्वाजा श्यान, राफे सिद्दीकी, रमीज सिद्दीकी, शादान अजीज, राव रमीज, हकीम इमरान, अदनान सिद्दीकी, नवेद उल हक सिद्दीकी, डाक्टर बिलाल मौजूद रहे।
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