नकुड़। सरसावा से पांचों शव पोस्टमार्टम के लिए चले जाने के बाद गांव खारीबांस पहुंचे मृतका अंजिता के हरियाणा के यमुनानगर जिले के गांव नंदगढ़ निवासी भाई राहुल ने बताया कि करीब एक साल पहले भी जीजा अशोक ने पूरे परिवार को नींद की गोलियां देकर मारने की कोशिश की थी। हालांकि गनीमत रही थी कि सभी सकुशल बच गए थे।
राहुल ने बताया कि सरसावा का वह मंजर अभी भी उसके दिमाग में घूम रहा है। बताया कि शवों देखकर लग रहा है कि गोली मारने से पहले उन्हें नींद या नशीली गोलियां दी गई होंगी। क्योंकि सभी अपने बिस्तर पर थे और देखकर नहीं लग रहा था कि उनके साथ हाथापाई हुई हो। राहुल ने बताया कि जब करीब एक साल पहले वह घटना हुई थी तब से सभी सतर्क रहते थे। जीजा अशोक को देखकर नहीं लगता था कि इस बार इतना बड़ा और घातक कदम उठा लेंगे।
गांव के पड़ोसी जितेंद्र राठौर ने बताया कि अशोक करीब कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान दिखाई दे रहा था। उसका चंडीगढ़ से इलाज भी चल रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि करीब साढ़े तीन वर्ष पूर्व अशोक के पिता सुरेंद्र सिंह की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस समय रिटायरमेंट के पांच-छह दिन शेष थे। इसके बाद अशोक को मृतक आश्रित में यह नौकरी मिली थी। वहीं, यह भी बताया जा रहा है कि कोरोना के समय अशोक ने आत्महत्या का प्रयास किया था।
राजस्व संग्रह अमीन की परिवार सहित मौत की सूचना पर तहसील कर्मियों में शोक की लहर दौड़ गई। संग्रह अमीन संघ व अन्य तहसील कर्मियों ने तहसील में शोक सभा आयोजित कर दो मिनट का मौन रखा। संघ के तहसील अध्यक्ष सुभाष चंद्र ने बताया कि अशोक बेहद साधारण किस्म का व्यक्ति था। वह केवल अपने काम से काम रखता था। बताया कि हत्या और आत्महत्या की बात हजम नहीं हो रही है, क्योंकि अशोक के ऊपर न तो विभाग के काम का कोई दबाव था और न ही कभी पारिवारिक कलह की बात सामने आई है। साथी अमीन मनीष नामदेव ने बताया कि अशोक को दिसंबर माह में ही खेड़ा अफगान का हल्का मिला था, इससे पहले उसके पास सरसावा के निकटवर्ती गांव रायपुर का हल्का था।