हथिनीकुंड बैराज पर चल रहा निर्माण कार्य
सहारनपुर। यूपी समेत चार राज्यों को जल आपूर्ति करने वाले हथिनीकुंड बैराज पर संकट मंडरा रहा है। बरसात के मौसम में आने वाली बाढ़ की वजह से यमुना नदी का तल (बेड) कटाव के चलते गहरा हो गया है, जिससे बैराज की नींव को कभी भी नुकसान हो सकता है। बैराज के खतरे को भांपकर इसे बचाने की कवायद की जा रही है। यहां पर सुरक्षा दीवार (डायाफ्राम) का निर्माण शुरू किया गया है, जिसमें करीब 146 करोड़ की लागत आएगी। हथिनीकुंड बैराज चार राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के जल बंटवारे को लेकर बना एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, जो सहारनपुर और यमुनानगर की सीमा पर स्थित है। दिल्ली की लगभग 60 प्रतिशत जल आपूर्ति हथिनीकुंड बैराज से ही होती है। यमुना नदी के मुख्य प्रवाह के अलावा हथिनीकुंड से दो नहरें निकलती हैं, जिसमें पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर है। पश्चिमी नहर से हरियाणा में यमुनानगर, करनाल और पानीपत के क्षेत्रों को पानी मिलता है, जबकि पूर्वी यमुना नहर से उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, शामली और बागपत आदि को पानी जाता है।
पिछले कई साल से बरसात के दिनों में यहां पर बाढ़ जैसे हालात हो जाते हैं। बैराज में जहां पर ओवरफ्लो पानी निकाला जाता है वहां पर यमुना नदी के बेड में कटाव हो गया है। इसकी वजह से कभी भी बैराज की नींव को नुकसान हो सकता है। इसे देखते हुए डायाफ्राम का निर्माण शुरू कर दिया गया है। हथिनीकुंड बैराज दिल्ली से 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बैराज से छोड़ा गया पानी को दिल्ली तक पहुंचने में करीब 72 घंटे का समय लगता है