तीन राज्यों की सीमा पर बसे सहारनपुर में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू होने का सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। इसकी वजह यह है कि हरियाणा और उत्तराखंड में वैट की दर कम होने के चलते यहां के लोग ज्यादातर खरीदारी उन्हीं राज्यों से करते आ रहे हैं। कि जीएसटी से यहां के लोगों में खरीदारी के प्रति नजरिया बदलेगा।
बहरहाल एक जुलाई से लागू होने जा रही इस नई व्यवस्था में फल, सब्जियां, दालें, गेहूं, चावल आदि टैक्स फ्री हैं जबकि चिप्स, बिस्किट, मक्खन, चाय और कॉफी पर ऊंची दर के टैक्स लगाए गए हैं। मगर एक बात तो तय मानी जा रही है कि जीएसटी लागू होने से सहारनपुर को इसका फायदा जरुर मिलेगा।
कई सामानों पर अप्रत्यक्ष टैक्स की दरों में सहारनपुर से हरियाणा और उत्तराखंड में फर्क है। अब राज्यों के बीच इस टैक्स की दरों में फर्क ख़त्म होने से कुछ सामानों की कीमतों में थोड़ा फेरबदल हो सकता है। फिलहाल जीएसटी पर सही जानकारी नहीं होने के चलते व्यापारी असमंजस में हैं। जीएसटी के बाद बाजार में किल्लत की आशंका जताई जा रही है। शुरुआत के 10 दिन तक टैक्स स्लैब के असमंजस को लेकर व्यापारी सहमे हैं।
फिलहाल जीवनरक्षक दवाओं से लेकर टैक्स के दायरे में आने वाली घरेलू चीजों की नई सीरिज बाजार में उपलब्ध नहीं है। कई प्रोडक्ट ऐसे हैं जो बाजार से गायब हो चुके हैं, मगर उसे दुकानदार अभी लाने से कतरा रहे हैं। ऐसे ही दवाओं पर टैक्स स्लैब के असमंजस को लेकर बाजार में कई दवाओं की अनुपलब्धता है। कुल मिलाकर अब बाजार में जीएसटी का पूरा असर है औरदुकानदार कोई रिस्क लेने को तैयार नहीं है।
हौजरी कारोबार में अपनी मजबूत दखल रखने वाला सहारनपुर का कपड़ा बाजार भी शांत पड़ा है। टैक्स स्लैब में होने की वजह से कपड़ा मंहगा होने की संभावना है। यही कारण है कि सहारनपुर के पकड़ा व्यापारी बाजार बंद कर इसका विरोध भी कर चुके हैं। यह माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा बाजार पर इसका असर पड़ सकता है। कपड़ा व्यापारी राधेश्याम नारंग का कहना है कि अब तक किसी भी सरकार ने कपड़े पर कोई टैक्स नहीं लगाया था।
मगर, जीएसटी में शामिल होने के बाद व्यापार पर असर पड़ेगा। जीएसटी में वुडकार्विग उद्योग को राहत मिलेगी। कारण, कच्चा माल पर लगने वाला टैक्स एक साल में रिटर्न मिलता था। वुडकार्विंग कारोबारी परविंदर सिंह बताते हैं कि जीएसटी में एक सप्ताह में रिटर्न का प्रावधान है
परेशानी हो तो हेल्प डेस्क पर संपर्क करें व्यापारी
सहारनपुर। जीएसटी को सुगम बनाने के लिए वाणिज्यकर विभाग ने कई कदम उठाए हैं। व्यापारियों की किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए विभाग ने हैल्पडेस्क बनाई है। शनिवार को लागू होने वाले जीएसटी को सफल बनाने के लिए वाणिज्यकर विभाग कोई कसर नहीं छोड रहा है।
उन्होंने जीएसटी से जुडी किसी भी समस्या और शंका के समाधान के लिए जीएसटी हैल्प डेस्क बनाई है। इसका नोडल अधिकारी असिस्टेंट कमिश्नर सुनील सत्यम को बनाया गया है। व्यापारी किसी भी समस्या के समाधान के लिए 7235001792, 7235001795 और 7235001755 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा केन्द्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क में 7017463213 पर संपर्क कर सकते हैं।
इलेक्ट्रानिक्स और ऑटोमोबाइल की कीमत बढ़ेगी
जीएसटी लागू होने से पहले ही टैक्सस्लैब के चलते इलेक्ट्रानिक और ऑटोमोबाइल कारोबार में सेल लग चुकी थी। हालांकि स्टाक क्लीयरेंस के बाद कारोबारी पहले नई सीरिज और उनकी कीमतों का आंकलन करने के बाद ही सामान लाएंगे।
अंबाला रोड स्थित इलेक्ट्रानिक शोरुम के संचालक बलजीत सिंह चावला बताते हैं कि एसी, फ्रिज और टीवी जैसेप्रोडक्ट पर टैक्स स्लैब बढ़ाया गया है, ऐसे में इनकी कीमतों में तीन फीसदी का बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। इससे प्रोडक्ट हमारे के लिए मंहगा हो जाएगा। ऑटोमोबाइल शोरुमके मालिक निपुन जैन का कहना है कि लक्जरी कारों की कीमतें बढ़ेंगी ।
बाजार में नहीं आ रहीं जीवनरक्षक दवाएं
जीएसटी में दवाओं पर कर के बारे में भ्रम की स्थिति है। जीएसटी में इंसुनलन और कुछ जीवन रक्षक दवाओं पर पांचफीसदी, सिरप आदि पर 12 फीसदी, मेटिकेडेट पेस्ट, मल्टीविटामिन और अन्य दवाओं पर 28 फीसदीतक का टैक्स है। कुछ दवाओं पर 18 फीसदी कर लगाने का प्रस्ताव है।
यही कारण है कि फुटकरदवा विक्रेता माल नहीं ला रहे थे। मगर, अब यह कमी समाप्त हो जाएगी। आईएमए के अध्यक्ष डा. रविन्द्रराणा बताते हैं कि अधिकांश जरूरी दवाओं के दाम 2.29 फीसदी तक बढ़ जाएंगे। मौजूदा व्यवस्थामें जरूरी दवाओं पर लगभग नौ प्रतिशत का कर लगता है। हालांकि इंसुलिन सहित कुछ दवाओंके दाम कम होने की उम्मीद है।