संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सांसद इमरान मसूद ने बीएसएनएल में नई वीआरएस योजना के संबंध में संसद में सवाल पूछा। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या सरकार कमजोर राजस्व के आधार पर कर्मियों की संख्या में 35 फीसदी की कटौती प्रस्तावित कर वीआरएस लानी जा रही हैं। कर्मचारी यूनियनों की जताई आपत्ति पर सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। जवाब ने सरकार ने कौटती को फिलहाल खारिज कर दिया है।
सांसद के संसदीय कार्य प्रभारी विपिन जैन ने बताया कि सवाल का जवाब संचार और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री डॉ. पेम्मासनी चंद्रशेखर ने दिया। बताया कि सरकार ने 2019 में बीएसएनएल के उद्धार के लिए व्यापक पैकेज स्वीकृत किया था। इसके चलते कर्मचारी लागत में 51 फीसदी की कटौती हुई और बीएसएनएल ने 2020-21 में मुनाफा कमाना शुरू कर दिया।
उन्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी 4जी तकनीक से कुल 95,537 साइटें लगाई जा चुकी हैं, जिनमें से 90,035 साइटें ऑनएयर हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उपकरण तकनीकी दृष्टि से 5जी अपग्रेडेबल है। सांसद मसूद ने कहा कि सरकार पूर्व में की गई वीआरएस नीति से लाभ का दावा कर रही है, लेकिन भविष्य की कार्यबल संरचना के संबंध में कोई ठोस नीति स्पष्ट नहीं की गई है। बीएसएनएल में 35 फीसदी कर्मचारी कटौती के संबंध में कई बार कर्मचारी और प्रतिनिधिमंडल सांसद इमरान मसूद से चिंता व्यक्त कर चुके हैं।