सहारनपुर। कुपोषित, अति कुपोषित, धात्री और गर्भवती महिलाओं को पोषाहार वितरण का हिसाब शासन मांग रहा है। तीन विभागों के समन्वय से पोषाहार का वितरण होता है, लेकिन अभी विभागों द्वारा डाटा तैयार नहीं कराया जा सका है। हालांकि एक विभाग की तरफ से डाटा तैयार कर भेजने का दावा किया जा रहा है।
पोषाहार वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूहों को इस कार्य में लगाया गया था। जिले में 700 स्वयं सहायता समूहों द्वारा कोटेदार के यहां से गेहूं और चावल लेकर उनके एक से दो किलो तक पैकेट तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें आंगनबाड़ियों को दिया जाता है। स्वयं सहायता समूह एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) और आंगनबाड़ी बाल एवं विकास पोषण विभाग की देखरेख में काम करती हैं। कोटेदार के यहां से राशन उठाने का डाटा जिला पूर्ति विभाग द्वारा शासन को भेेजा जाता है, तभी कोटेेदार के खाते में इसका पैसा आता है। इस लिहाज से तीन विभागों के समन्वय से पोषाहार का वितरण होता है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक तीनों विभागों में समन्वय का अभाव है, जिस कारण पोषाहार बंटने का सही डाटा तैयार नहीं हो पाता है, जबकि शासन ने पत्र लिखकर हिसाब मांगा है। सूत्रों का कहना है कि बाल विकास विभाग आंगनबाड़ियों द्वारा बांटे गए पोषाहार के हिसाब से डाटा भेजता है, लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण अजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों द्वारा पोषाहार के पैकेट तैयार कर आंगनबाड़ियों को दिए जाते हैं, जिसका डाटा संबंधित विभाग नहीं जुटा पाया है।
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शासन ने दिया पूरा पोषाहार, बंटा कम
शासन की ओर से शत-प्रतिशत कुपोषितों का पोषाहार भेजा गया। सूत्रों के मुताबिक एक विभाग ने जो डाटा शासन को भेजा है, उसमें 100 प्रतिशत में 70 प्रतिशत पोषाहार ही बंटा है। ऐसे में साफ है कि पोषाहार में कटौती की जा रही है।
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वर्जन -
पोषाहार बंटने का डाटा उनका विभाग शासन को भेज चुका है। हर माह रिपोर्ट तैयार कर भेजी जाती है। दूसरे विभागों के बारे में उनको जानकारी नहीं है। उनका विभाग शत-प्रतिशत पोषाहार बंटवा रहा है। -- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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वर्जन -
स्वयं सहायता समूहों द्वारा पोषाहार के पैकेट तैयार कराने के संबंध में डाटा तैयार कराया जा रहा है। पिछले दिनों कोरोना के कारण कार्य प्रभावित हुआ था। जल्दी ही रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। -- अरुण उपाध्याय, उपायुक्त, एनआरएलएम