गंगोह (सहारनपुर)। श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को आचार्य रजनीश जी महाराज ने कहा कि इस युग में भगवान की भक्ति करना कोई कठिन कार्य नहीं है। प्रभु का स्मरण करने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
भगवान श्री कृष्ण के अवतार के बाद नंद बाबा के यहां खुशियां मनाई गई। जन्म होते ही भक्त नाचने-झूमने लगे। बधाई गीत गाए गए और नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जैसे जयकारों से परिसर गूंज उठा। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित से शुकदेव कहते है कि जब-जब धर्म की हानि होती है, संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते है। इसके बाद आचार्य रजनीश ने संगीतमयी चौपाइयों जब-जब होई धर्म की हानि, बाढ़हि असुर अधम अभिमानी, तब-तब धरि प्रभु मनुज शरीरा, हरहि कृपा निज सज्जन पीरा आदि से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। कथा वाचक ने प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जेल में वासुदेव के यहां अवतार लेकर संतों व भक्तों का सम्मान बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि जब भक्ति मार्ग में भक्त लीन रहता है, तभी प्रभु दर्शन होते है। कथा आयोजक प्रीति संजय भारद्वाज ने कथा व्यास का स्वागत कर उन्हें माला पहनाकर गद्दी पर बैठाया। संचालन कश्यप कुमार फौजी ने किया। आरती कथा आयोजक प्रीति संजय भारद्वाज, संजय शर्मा, श्रवण शर्मा, राजकुमार, अतुल बंसल, दिशू नामदेव, राम किशन सिंघल, पायल बंसल, नवीन पांचाल ने कराई। श्याम परिवार गंगोह एवं राम किशन सिंघल के सौजन्य से प्रसाद वितरण किया गया।
गंगोह के महादेव कुटी में आयोजित कथा में कथा का वर्णन करते आचार्य रजनीश- फोटो : SAHARANPUR