यह था मामला
दरअसल, वर्ष 2015 में दारुल उलूम की वेबसाइट पर किसी व्यक्ति ने गजवा-ए-हिंद को लेकर जानकारी मांगी थी। जिस पर दारुल उलूम ने अपने जवाब में पुस्तक सुन्नत-अल-नसाई का हवाला दिया था। कहा था कि गजवा-ए-हिंद को लेकर इसमें पूरा एक अध्याय है। बाल संरक्षण आयोग ने कहा था कि यह देश विरोधी है, क्योंकि इसमें गजवा-ए-हिंद को इस्लाम के नजरिए से जायज बताया गया है।
मामले में आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा था और जांच रिपोर्ट भी मांगी थी। पुलिस-प्रशासन की संयुक्त जांच कमेटी ने दारुल उलूम मे जाकर पूरे मामले की जानकारी जुटाई।
दारुल उलूम की तरफ से लिखित में जवाब दिया गया था कि यह पुराना फतवा है। इसका वर्तमान से कोई संबंध नहीं है। जांच रिपोर्ट पुलिस-प्रशासन की तरफ से आयोग को भेज दी गई थी, जिस पर अब आयोग ने आपत्ति जताई है।
आयोग की ओर से पत्र मिला है, जिसमें मामले को लेकर दोबारा रिपोर्ट मांगी गई है। जांच कराकर जल्द रिपोर्ट भेजी जाएगी। -डॉ. दिनेश चंद्र, डीएम
आयोग का पत्र आया है। जो भी निर्देश दिए गए हैं उनका पालन किया जाएगा। - डाॅ. विपिन ताडा, एसएसपी