घाटे का सौदा बनी बासमती धान की खेती
देवेंद्र कुमार
सहारनपुर। बासमती धान की खेती इस बार जिले के किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है। मंडी में बासमती की विभिन्न प्रजातियों के रेट गत वर्ष की अपेक्षा औसतन चार सौ रुपये प्रति क्विंटल कम चल रहा है। इसके चलते किसान टेंशन में हैं।
पिछले साल जहां पूसा नंबर-1 का मंडी में 2800-2900 रुपये प्रति क्विंटल का औसत रेट रहा, वहीं इस बार वह लगभग 2400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। बासमती की 1121 प्रजाति गत वर्ष मंडी में 3000 से 3100 रुपये के औसत भाव से बिकी थी। इस बार इसका औसत रेट 2600 रुपये चल रहा है। बासमती की 1509 प्रजाति की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। पिछले साल औसतन 2700 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाली बासमती का औसत रेट इस बार 2400 रुपये प्रति क्विंटल ही चल रहा है।
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--क्या कहते हैं किसान
पूसा नंबर-1 को मंडी में बेचने आए ग्राम डाडली के किसान शुभम ने बताया कि एक ओर पैदावार कम हुई है दूसरे तरफ रेट भी पिछले साल की तुलना में कम मिला है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष उनकी पूसा नंबर-1 प्रजाति की बासमती 2800 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। आज उन्हें 2400 रुपये में बेचनी पड़ रही है।
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गांव संभलहेड़ी के किसान संजय ने बताया कि इस बार बासमती धान बाजार में पिट रहा है। पिछले साल पूसा बासमती नंबर-1 को 3000 रुपये प्रति क्विंटल इसी मंडी में बेचा था। इस बार 2400 रुपये का भाव ही मिला है। साथ ही उत्पादन भी कम रहा है।
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गांव पंचकुंआ निवासी किसान मांगेराम भी बासमती धान के रेट से निराश हैं। उनका कहना है कि एक तो बासमती धान में लागत अन्य धान की तुलना में अधिक आती है दूसरे इस बार उत्पादन भी गत वर्ष की अपेक्षा कम है। रेट कम होने से बासमती धान की खेती में घाटा है।
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मंडी में बासमती धान बेचने आए ग्राम सुनहैटी खड़खड़ी निवासी किसान सतीश का कहना है कि इस बार उन्होंने बासमती की 1637 प्रजाति लगा रखी थी। उत्पादन तो अच्छा हुआ, लेकिन रेट संतोषजनक नहीं मिला। उन्हें आज इसका रेट 2200 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल सका।
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--क्या कहते हैं आढ़ती
-- उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के जिलाध्यक्ष और आढ़ती मदन मोहन मित्तल ने बताया कि बासमती चावल का निर्यात प्रभावित होने के चलते मंडी में इसके धान के रेट कम चल रहे हैं। बासमती धान में कीटनाशकों का प्रयोग ज्यादा होता है, जिसका असर उनके चावल में भी रहता है। दूसरा ईरान पर अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध का भी रेट पर विपरीत असर पड़ा है। यही कारण है कि इस बार बासमती धान का भाव औसतन 400 रुपये प्रति क्विंटल कम चल रहा है।
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आढ़ती सचिन का कहना है कि पूसा नंबर-1 का पिछले साल का रेट 2800 से 2900 रुपये प्रति क्विंटल था। जो इस बार 2000 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहा है। बासमती धान का निर्यात प्रभावित होने से बाजार में इसका रेट कम चल रहा है। बासमती की विभिन्न प्रजातियों का एक्सपोर्ट होता है। अब घरेलू खपत के हिसाब से ही बासमती धान का भाव चल रहा है। इससे बासमती की सभी प्रजातियां प्रभावित हुई हैं।
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मंडी समिति की सचिव नीलिमा गौतम ने बताया कि बाजार में डिमांड कम होने से बासमती की विभिन्न प्रजातियों का रेट गत वर्ष की तुलना में काफी कम चल रहा है। एक तो निर्यात प्रभावित है दूसरे इस बार क्वालिटी भी कमजोर है। इसका असर रेट पर पड़ा है।
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जनपद में धान का कुल रकबा-----59586 हेक्टेयर
बासमती धान का रकबा-----38102 हेक्टेयर