सहारनपुर। सहारनपुर विकास प्राधिकरण ने सीलिंग की जमीन का प्रारुप बदलने के मामले में तहरीर दी है। इसमें उस शोरूम संचालक को आरोपी बनाया गया है, जिसकी तरफ से फाइल में सीलिंग मुक्त दर्शाने का फर्जी पत्र लगाया गया था। अमर उजाला ने 26 अगस्त के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
दरअसल, सदर तहसील के खानआलमपुरा में खसरा नंबर 262/1 की करीब 4920.96 वर्ग मीटर से अधिक जमीन को राज्य सरकार ने वर्ष 1993 में अपने कब्जे में ले लिया था। अधिनियम 1976 के तहत 28 जनवरी 2002 को जमीन के प्रबंध और बंदोबस्त की जिम्मेदारी सहारनपुर विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी गई।
आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षर कर सीलिंग की जमीन का प्रारूप ही बदल दिया। इसके बाद जमीन पर बिल्डिंग भी खड़ी कर दी गई। मामले का खुलासा तब हुआ जब प्राधिकरण की ओर से ही अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को पत्र लिखकर यह पूछा गया कि विभाग की ओर से भेजा गया कौन से पत्र की आख्या सही है।
एक पत्र में जमीन को सीलिंग से मुक्त, जबकि दूसरे पत्र में जमीन को सीलिंग की बताया गया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व की ओर से जब सीलिंग से मुक्त वाला पत्र मांगा गया तो वह पत्र भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
पूरा मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने एसडीएम को दो बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और दोषियों कर्मियों और लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद प्राधिकरण ने सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई।