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गागलहेड़ी पहुंच गंदे नाले में तब्दील हो गई हिंडन

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हरोड़ा में हिंडन नदी का स्वरुप - फोटो : SAHARANPUR
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गागलहेड़ी (सहारनपुर)। प्रदूषण और अतिक्रमण से घिरी हिंडन की दशा सुधारने को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं हैं। न अतिक्रमण हटाया जा रहा है और न प्रदूषण रोका जा रहा है। यही वजह है कि अपने उद्गम स्थल से करीब 45 किलोमीटर का सफर तय करके जब हिंडन नदी गागलहेड़ी क्षेत्र में पहुंचती है तो गंदे नाले की तरह हो जाती है। नालों के गंदे पानी से लेकर फैक्टरियों का दूषित पानी ने इसमें डाला जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कतई चिंता नहीं कर रहे हैं।
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दरअसल, बुड्ढाखेड़ा पुंडीर से सोना सैय्यद माजरा, हरोड़ा, पाली, खतोली, माजरी, उग्राहु, गागलहेड़ी, खजूरी अकबरपुर, कोलकी कलां, भाभरी, बेरीतगा होते हुए टपरी गांव तक हिंडन अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रही है। गागलहेड़ी के पुराने पुल के एक तरफ नदी में मृत पशुओं की खाल बिना किसी रोक टोक के उतारी जाती है तथा मृत पशुओं के अवशेष भी खुले में पड़े रहते हैं। हरोड़ा गांव के मीट प्लांट से भी कचरा हिंडन नदी में बहाया जा रहा है तो, शुगर मिल से पानी हिंडन नदी में छोड़ा जाता है। इन सभी कारणों की वजह से हिंडन नदी गागलहेड़ी क्षेत्र में आकर प्रदूषण से घिर चुकी है।
जांच के लिए सिंचाई विभाग को भेजकर मांगी जानकारी
सहारनपुर। टपरी में शराब फैक्टरी के पीछे हिंडन नदी से सटाकर नवनिर्माण को लेकर जांच चल रही है। उसके संबंध में उपजिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह ने सिंचाई विभाग को पत्र भेजकर कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। पूछा है कि नदी से कितनी दूरी पर किसी प्रकार का निर्माण हो सकता है। वहीं, सिजरा में हिंडन की स्थिति जानने के लिए रिकार्ड खंगाला जा रहा है। हल्का लेखपाल से भी रिपोर्ट तलब की गई है। राजस्व विभाग, चकबंदी और सिंचाई विभाग से रिपोर्ट आने जांच पूरी होगी।
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ग्रामीण बोले, 20 साल में बदला हिंडन का स्वरूप
खजूरी अकबरपुर निवासी कंवरपाल यादव ने बताया कि 20 साल पहले तक हिंडन नदी किनारे हरियाली थी। जितना पानी नदी में अब बरसात से आता है उतना साल भर रहता था। अतिक्रमण की वजह से नदी का अस्तित्व खतरे में है। फैक्टरियों के कचरे ने इसके किनारे की हरियाली भी लील ली है।
दिनारपुर निवासी आधार भारद्वाज ने बताया कि पिछले सालों में प्रशासन द्वारा हिंडन नदी को कब्जा मुक्त कराकर फसलों को नष्ट कराया था। समय बीतने के साथ फिर से अतिक्रमण हो गया। अधिकारी भी रस्म अदायगी कर नदी किनारों पर पौधरोपण कर लेते हैं। मृत पशुओं के अवशेष नदी में डालने और फैक्टरियों के कचरे पर कड़ाई से रोक लगनी चाहिए।
हरोड़ा गांव के पूर्व प्रधान साहब राव ने बताया कि कभी उफान पर बहने वाली हिंडन नदी आज नाले के रूप में बह रही है। नदी के दोनो तरफ हजारों बीघा जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है। इस कारण नदी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रही है।
हिंडन नदी के संबंध में सिंचाई विभाग को पत्र भेजा गया है। उसका जवाब अभी नहीं मिला है। राजस्व अभिलेख के संबंध में भी रिपोर्ट मांगी है। जल्द ही जांच पूरी होगी। - अनिल कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी सदर
सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी नदियों और नहरों में पानी के डिस्चार्ज को लेकर है। हिंडन नदी की जमीन पर अतिक्रमण हुआ या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग राजस्व विभाग करता है। -- विकास चंद्रा, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड

गागलहेड़ी में अवैध कब्जों के चलते नाले में तब्दील हुई हिंडन- फोटो : SAHARANPUR

कंवरपाल सिंह यादव- फोटो : SAHARANPUR

आधार भारद्वाज- फोटो : SAHARANPUR

पूर्व प्रधान साहब राव- फोटो : SAHARANPUR

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