तहसील बेहट क्षेत्र के घाड़ इलाके में पानी के लिए हा हाकार मचा हुआ है। लोग बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं, लेकिन जलनिगम के अधिकारी हालात से वाकिफ होते हुए इस इलाके में गहराए पेयजल संकट से निपटने के लिए अभी तक किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचे। पानी के लिए परेशान लोगों को रजवाहों से प्यास बुझाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जानवर और इंसान दोनों हलकान है।
गर्मी की तपिश में घाड़ इलाके के तकरीबन 122 गांवों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। बिजली आपूर्ति की बदहाल व्यवस्था एवं पेयजल पाइप लाइनों की खस्ताहाल के चलते जलनिगम की पेयजल परियोजनाएं भी इस इलाके में लोगों की प्यास बुझाने के लिए नाकाफी साबित हो रही है। ऊपर से हैंडपंपों के हलक भी लगातार सूख रहे है। बड़ी संख्या में हैंडपंप बंद हो चुके हैं।
नानूवाला, घाड़ इलाके के इस गांव की आबादी करीब 2100 है। पूरे गांव में पांच हैंडपंप है, जिनमें से दो हैंडपंप बंद हो चुके हैं। चालू तीन हैंडपंप भी बीच-बीच में पानी छोड़ देते हैं। पांच साल हो गए, इस गांव में कासमपुर पेयजल परियोजना से पेयजल की आपूर्ति नहीं हुई।
मात्र तीन हैंडपंपों पर पूरे गांव की आबादी एवं मवेशियों की प्यास बुझाने का जिम्मा है। दिन निकलते ही इस गांव में हैंडपंपों पर महिलाओं और बच्चों को भीड़ लग जाती है।
कासमपुर पेयजल परियोजना पर तैनात ऑपरेटर रकम सिंह ने बताया कि पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने से नानूवाला में पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस संबंध में वह अधिकारियों को कई बार अवगत भी करा चुके हैं।
यहीं हालात नागलमाफी गांव के मजरे भूरीवाला और फतेहपुर नौआबाद की है। भूरीवाला गांव में 18 परिवार रहते हैं। नागलमाफी पेयजल परियोजना से इस गांव में पेयजल की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन पिछले एक साल से पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां की आपूर्ति बंद पड़ी है। पूरे गांव में एक हैंडपंप लगा है, वह पिछले पांच महीने से बंद पड़ा है।
यहां के लोगों को करीब डेढ़ किमी दूर स्थित भूरादेव मंदिर के कुएं से पानी ढोन पड़ता है। फतेहपुर नौआबाद में कोई हैंडपंप नहीं है। 52 परिवारों वाले इस गांव में नागलमाफी पेयजल परियोजना से ही पानी की आपूर्ति होती थी। मगर पाइप बंद होने से यहां भी लोगों को सालों से पानी नहीं मिल पा रहा है। दो किमी पैदल चलकर यहां के लोग भी भूरादेव मंदिर के कुएं से पानी भरकर ले जाते हैं।
मवेशियों को पानी पिलाने के लिए यहां के लोगों को दूर जंगल में किसी ट्यूबवेल पर ले जाना पड़ता है। बड़कलां गांव के भी यहीं हालात है। यहां के लोगों को एक किमी दूर वन विभाग की चौकी पर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है। पूरे घाड़ इलाके में इस समय पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है।
सूरत-ए-हाल
घाड़ इलाके में जलस्तर करीब 400 फीट पर है। गरीब लोग होने के कारण यहां के लोग अधिक खर्चीला हैंडपंप या फिर ट्यूबवेल लगवाने में सक्षम नहीं है। एक हैंडपंप पर 2.50 से तीन लाख रुपये का खर्च आता है।
पूरी तरह से यह इलाका पानी के मामले में सरकारी मशीनरी पर निर्भर है। नागलमाफी की ग्राम प्रधान संगीता देवी ने बताया, कि भूरीवाला में खराब पड़ा हैंडपंप 390 फीट पर है। इतनी गहराई तक होने के बाद भी वह बंद हो गया।
घाड़ मजदूर मोर्चा के चाणूराम ने कहा कि जलनिगम को स्थिति से निपटने के लिए सभी पेयजल परियोजनाओं पर गर्मी-गर्मी जनरेटर लगाने के साथ ही खराब पड़ी पाइप लाइनों को ठीक कराना चाहिए। इससे पेयजल की आपूर्ति समय और पर्याप्त मात्रा में हो सकती है।
अधिकारी कहिन
हाल ही में 3.66 लाख रुपये का बजट मिला ह्रै। हालांकि यह बजट नाकाफी है, लेकिन फिर भी स्थिति से निपटने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। पेयजल परियोजनाओं पर जनरेटर की व्यवस्था किए जाने के साथ ही खराब पड़ी पाइप लाइनों की मरम्मत का कार्य तेजी के साथ कराया जाएगा।
- रविंद्र सिंह, एक्सईएन, जल निगम।