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रामपुर मनिहारान में संगीनों के साये में अंतिम संस्कार, फोर्स तैनात

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गांव जानखेड़ा में घर के बाहर बैठे गमजदा परिजन। - फोटो : SAHARANPUR
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रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। जानखेड़ा में दामाद द्वारा ससुर व बेटे की हत्या के चलते गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद देर रात गांव पहुंचे। दोनों के शव का गमगीन माहौल में पुलिस एवं पीएसी की मौजूदगी में रात को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव में सुरक्षा की दृष्टि से पीएसी को तैनात किया गया है।
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गांव जानखेड़ा निवासी परशुराम के दामाद सचिन ने गांव में ही आकर अपने ससुर एवं अपने साढ़े छह वर्षीय बेटे की चार नवंबर सुबह सात बजे गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड का अंजाम देने के बाद सचिन खुद की अपनी गोली का शिकार हो गया था। तीन मौत के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी। मौके पर पहुंचे एसएसपी दिनेश कुमार पी, एसपी सिटी विनीत भटनागर, सीओ नकुड़ यतेंद्र नागर, एसडीएम नकुड़ सीपी राणा ने ग्रामीणों को समझा बुझा कर दोनों शवों को पीएम के लिए भेजा था। सोमवार रात को ही तीनों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। शवों के पहुंचने से पुलिस एवं पीएसी तैनात कर दी गई। रात में ही कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार किया गया।
मृतक परशुराम के पुत्र पंकज ने बताया कि उसकी बहन मोनिका की शादी नकुड़ थाने के देदपुरा निवासी सचिन के साथ हुई थी शादी के एक वर्ष बाद ही सचिन ने उन्हें तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। पंकज ने बताया कि उसकी शादी वर्ष 22 मार्च 2014 को होनी थी। वह अपने जीजा सचिन के साथ दो फरवरी 2014 को शादी के कार्ड बांट रहा था। इसी दौरान सचिन ने उसको गोली मार दी थी, जिसमें वह बच गया था। इस घटना के बाद सचिन को जेल हो गई। पंकज ने बताया कि इस घटना के बाद उसकी शादी भी टूट गई थी। जमानत पर सचिन के जेल से आने के बाद से वह फरार चल रहा था, जिसमें उसके वारंट भी हो चुके थे और पुलिस ने घर की कुर्की भी कर ली थी।
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सचिन के अपहरण की रिपोर्ट भी कराई थी
पंकज ने बताया कि सचिन के कई दिन तक घर से लापता होने के कारण अप्रैल 2019 में सचिन के परिजनों ने उनके खिलाफ सचिन के अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सचिन लगातार उन्हें केस वापस लेने के लिए दबाव बना रहा था और केस वापस न लेने पर जान से मारने की धमकी दे रहा था।
पुलिस कार्रवाई करती तो नहीं होती वारदात
पंकज ने बताया कि सचिन उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दे रहा था। उन्होंने उसके धमकी भरे फोन की सीडी बनाकर 14 अप्रैल 2019 को रामपुर पुलिस को सौंपी थी। पंकज ने आरोप लगाया कि सीडी दिए जाने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। सचिन की धमकियों से परेशान होकर उन्होंने प्रधानमंत्री, मुख्य मंत्री, एसएसपी कार्यालय को प्रार्थना पत्र भेजा। जिसमें सचिन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद सचिन ने वारदात को अंजाम दे दिया। पुलिस कार्रवाई करती तो उसके पिता परशुराम एवं अंशुल की जान बच सकती थी।
पहले रामपुर रेलवे स्टेशन पर किया था तलाश
पंकज ने बताया कि सचिन वारदात को रविवार को ही अंजाम देता। वर्ष 2014 में उसने फरवरी में रविवार के ही दिन उसे गोली मारी थी। सचिन को पता था कि वह दिल्ली से रविवार को ही आता है और सोमवार सुबह दिल्ली के लिए निकल जाता है। हत्याकांड के दिन चार नवंबर सोमवार को पहले सचिन ने सुबह छह बजे उसे रामपुर रेलवे स्टेशन पर तलाश किया, जब सचिन को वह स्टेशन पर नहीं मिला तो वह उसके घर पहुंच गया और वारदात को अंजाम दे डाला। सचिन ने उसे टारगेट बना रखा था। किस्मत से वह बच गया।
सचिन की मां पुलिस हिरासत में
अपने ससुर परशुराम और बेटे अंशुल की हत्या के बाद सचिन की भी गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में मृतक परशुराम के भतीजे राकेश ने सचिन और उसके दो भाइयों, पिता और मां के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने सचिन की मां को हिरासत में ले लिया है।

गांव जानखेड़ा में तैनात पीएसी के जवान।- फोटो : SAHARANPUR

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