सहारनपुर। स्वाधीनता की सुबह शहर और गांवों में लोगों ने तिरंगा लेकर रैली निकाली। उस समय कागज पर ही हल्दी से पीला रंग, पेड़ की पत्तियों से हरा रंग बनाकर लोगों ने तिरंगा बनाया था। आजादी की खुशियां बांटने के लिए लोगों ने घरों में रखी शक्कर और गुड़ एक-दूसरे को खिलाया। हवा में उस दिन एक अलग ही ताजगी थी। अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में पूर्व सैन्यकर्मियों ने सेवाकाल के दौरान संस्मरण और घटनाओं को भी याद किया।
महानगर के सन सिटी स्थित सभागार में हुए संवाद कार्यक्रम में सेवानिवृत्त वारंट अफसर अनिल कुमार त्यागी ने अपने पिता की बताई बातें साझा की। उन्होंने बताया कि पिताजी धर्म सिंह बताते थे कि पड़ोसी देश से आए लोगों को गांवों में शरण दी गई। विभाजन का दर्द आज भी है। सैन्यकर्मियों ने कहा कि सेना का जवान तो देश की सेवा करता ही है, उनके परिवार भी सैन्यकर्मी की तरह जीवन जीते हैं। फ्लाइंग ऑफिसर प्रीतम सिंह बताते हैं कि कारगिल में तैनाती के दौरान का एक किस्सा बड़ा साहसी है। फ्रंट लाइन पर पड़ोसी देश की सैन्य गतिविधियां काफी बढ़ गई थी। ऐसे में सेना ने बेस पर सैनिकों के परिवार खासकर महिलाओं और बच्चों को अन्य जगह पर भेजने का आदेश दिया। ऑर्डर को सुनकर किसी भी महिला ने बेस छोड़कर जाने से मना कर दिया। जब तक ऑपरेशन पूरा नहीं हुआ। तब तक सभी वहां पर सेना के साथ मजबूती से डटे रहे।
सूबेदार मेजर बिजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि देश को आजादी तो मिली, लेकिन हमें विभाजन का भी दंश झेलना पड़ा। सूबेदार मेजर अनिल कुमार और पवन सिंह चौहान ने बताया कि देश आजाद हो चुका है, लेकिन हमें आज भी पूर्ण रूप से आजादी पानी होगी। आजादी सामाजिक बुराइयों से, आजादी कुरीतियों से, आजादी भ्रष्टाचार से। इस अवसर पर कृष्ण पाल, सुरेश वत्स, राज सिंह माजरा, बच्चन सिंह, विनोद कुमार आदि ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
बोले सैन्यकर्मी
- पूर्व सैनिक संगठन के जिलाध्यक्ष और सेना मेडल विजेता सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि देश ने आजादी के बाद से लंबा सफर तय किया है। अपने सेवाकाल का किस्सा बताते हुए कहते हैं कि नीलगिरी की पहाड़ियों पर दिखाए गए साहस के लिए सेना मेडल प्राप्त हुआ है। देश की युवा पीढ़ी भी देश सेवा के लिए आगे आए।
- सूबेदार रविंद्र धीमान ने बताया कि देश को आजाद कराने में अनेक मां भारती के वीर सपूतों ने बलिदान दिया देश के नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वह ऐसी कोई भी हरकत न करें, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़े। यही शहीद स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
- सार्जेंट एनपी सिंह बताते हैं कि सेना पर देश के नागरिकों का अटूट भरोसा है। यही भरोसा उन्हें विषम परिस्थितियों में देश सेवा का जज्बा प्रदान करता है। सेवानिवृत्ति के बाद भी सैनिक कभी रिटायर नहीं होता।
- वारंट अफसर अनिल कुमार त्यागी अपनी सेवाकाल का एक किस्सा साझा करते हैं। बताते हैं कि राष्ट्रीय पर्व के आसपास पड़ोसी देश ने सीजफायर का उल्लंघन कर दिया। अवंतीपुर में भारी बर्फबारी के चलते हेलीपैड ब्लॉक हो गया। रेस्क्यू की सूचना मिलते ही सेना के जवानों ने ढाई फीट बर्फ के बीच न सिर्फ हेलीपैड को साफ किया, बल्कि जवानों और नागरिकों का सफल रेस्क्यू किया।