सहारनपुर। जिले की चीनी मिल एक क्विटंल गन्ने से करीब औसतन 0.77 किलो चीनी अधिक बना रही है। यह पिछले वर्ष के औसत 9.86 से अधिक है। इसका मतलब है कि गन्ने की मिठास बढ़ी है। इसमें सबसे अधिक परता देवबंद चीनी मिल की है।
जिले में इस बार अच्छी बारिश हुई। बारिश के चलते कई दिनों तक गन्ने के खेतों में पानी भरा रहा। इससे पैदावार को नुकसान पहुंचा, लेकिन चीनी परता के लिए मौसम अनुकूल रहने के चलते एक क्विंटल गन्ने से औसत से अधिक चीनी बन रही है। चीनी रिकवरी में जबरदस्त इजाफा होने के चलते मिल प्रबंधन और किसान, दोनों की उम्मीदें बढ़ी हैं। गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार चीनी परता औसत 10.05 है। मतलब एक क्विंटल गन्ने से करीब 10.05 किलो चीनी बन रही है, जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में यह आंकड़ा करीब सवा 9 प्रतिशत था। चीनी परता बढ़ने से चीनी मिलों को फायदा होगा। जितनी अधिक चीनी बनेगी, उतनी ही तेजी से किसानों को भुगतान हो सकेगा। इसका कारण यह है कि चीनी मिलों को गन्ना भी उतना ही खरीदना है और चीनी बनाने का प्रोसेस भी वहीं रहेगा।
अभी तक देवबंद चीनी मिल की चीनी परता 10.73 है। जो कि पिछले वर्ष इसी अवधि में 9.18 प्रतिशत थी। इसी तरह गांगनौली चीनी मिल में परता 10.05 है। जो पिछले वर्ष 9.87 प्रति क्विंटल औसतन रही। इसी तरह शेरमऊ चीनी मिल की परता 9.43, गागलहेड़ी की 9.33, बिड़वी की 9.66, नानौता चीनी मिल की 9.91 और सरसावा चीनी मिल की परता 9.75 है।
- अभी तक हुई 206 लाख क्विटंल गन्ने की पेराई
जिले की आठ चीनी मिलों के पेराई सत्र की शुरुआत नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में हुई थी। अभी तक चीनी मिलों ने कुल 206.98 लाख क्विटंल गन्ने की पेराई की है। इसमें सबसे अधिक पेराई 69.69 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई देवबंद मिल ने की है। सबसे कम पेराई गागलहेडी चीनी मिल ने 8.81 लाख क्विंटल गन्ने की हैं।
- वर्जन
अभी तक चीनी रिकवरी पिछले वर्ष के मुकाबले अच्छी है। औसतन 10.05 गन्ना रिकवरी सभी चीनी मिलों की है। पैदावार कम होने के बावजूद चीनी रिकवरी से मिल और किसानों को फायदा होगा। - सुशील कुमार, जिला गन्ना अधिकारी