सहारनपुर। महानगर की बेशकीमती जमीन के मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एक अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर कर उसका प्रारूप बदल दिया गया, जो जमीन अर्बन सीलिंग के तहत राजस्व में निहित थी, उसे सीलिंग से मुक्त दिखा दिया।
यहां तक कि उस पर बिल्डिंग भी बना दी गई। जिलाधिकारी ने विकास प्राधिकरण से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने और एफआइआर के आदेश दिए हैं।
सदर तहसील के खानआलमपुरा में खसरा नंबर 262/1 की करीब 4920.96 वर्ग मीटर से अधिक जमीन को राज्य सरकार ने वर्ष 1993 में अपने कब्जे में ले लिया था। अधिनियम 1976 के तहत 28 जनवरी 2002 को जमीन के प्रबंध और बंदोबस्त की जिम्मेदारी सहारनपुर विकास प्राधिकरण को हस्तांरित कर दी गई थीं। इसी दौरान प्राधिकरण के कर्मियों के साथ सांठगांठ कर जमीन की स्थिति को फर्जी तरीके से बदल दिया गया। फर्जी हस्ताक्षर कर उसे सीलिंग मुक्त दर्शाकर खरीदना-बेचना शुरू कर दिया। लोगों ने जमीन पर इमारत भी खड़ी कर दी।
ऐसे खुला मामला : प्राधिकरण की तरफ से अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को सात मई 2025 को पत्र भेजा गया। पत्र में पूछा गया कि ग्राम खान आलमपुरा के खसरा नंबर 262/1 क्षेत्रफल 3073.80 वर्गमीटर भूमि सीलिंग से मुक्त की गई है या नहीं।
पत्र के जवाब में प्राधिकरण को बताया कि जमीन सीलिंग से मुक्त नहीं की गई है। इसके बाद दो पत्रों की छायाप्रति संलग्न कर दो जुलाई 2025 को प्राधिकरण ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को पत्र भेजा। पूछा कि किस पत्र की आख्या सही है और किस की गलत। इसके जवाब में 16 जुलाई 2025 को अधिकारी ने अवगत कराया कि जमीन अर्बन सीलिंग से मुक्त नहीं की गई है। एक पत्र फर्जी है। प्रशासन ने प्राधिकरण से आगामी कार्रवाई के लिए सीलिंग मुक्त बताए जाने वाला पत्र मांगा, लेकिन कई बार लिखित और मौखिक रूप से मांगने के बाद भी पत्र नहीं दिया। तब प्राधिकरण शक के घेरे में आया।