डकैती और हत्या के चार आरोपियों को आजीवन कारावास
सहारनपुर। डकैती के दौरान हत्या किए जाने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-07) अनामिका चौहान की कोर्ट ने चार आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास और 70-70 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को सजा हुई।
सहायक शासकीय अधिवक्ता संदीप सिंह ने बताया कि 20 अगस्त 2015 को कस्बा रामपुर मनिहारान के मोहल्ला कायस्थान निवासी पूरण सिंह सैनी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बदमाशों द्वारा घर में घुसकर हमला करने और नकदी, जेवर, बैंक पासबुक सहित अन्य सामान ले जाने का आरोप लगाया था। वारदात के दौरान घायल हुए परिवार के सदस्य कुलवीर (37 वर्षीय) की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
रामपुर मनिहारान थाना पुलिस ने वारदात का खुलासा कर जवाब पुत्र दंगल, करण पुत्र तेजपाल, तेजपाल पुत्र मुनिया निवासी गोला घाट, कोतवाली सुल्तानपुर (यूपी) और राजा उर्फ महजवी पुत्र सफीक अहमद निवासी सैदपुर हलवाना, गंगोह (सहारनपुर) को गिरफ्तार किया था। इनसे जेवर, बैंक पासबुक तथा अन्य सामान बरामद किया था।
मामला न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कक्ष सं-07) अनामिका चौहान की अदालत में चला। तमाम साक्ष्य और दलीलों को सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने शुक्रवार को इस केस में फैसला सुनाया और चारों आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास और 70-70 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने सजा का आधार
सहारनपुर। इस केस में जो लोग गवाह थे, वह आरोपियों को नहीं पहचान पाए थे। क्योंकि बदमाशों ने डकैती डालने के दौरान उन्हें घायल करके अन्य कमरे में बंद कर दिया था और बदमाशों ने मुंह पर कपड़ा भी बांध रखा था। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के आधार पर तर्क दिया कि पीड़ित के घर से जो सामान गया है, वही सामान आरोपियों से बरामद भी हुआ है। इसी के चलते परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को सजा मिली।
पुलिस की मजबूत पैरवी का दावा
सहारनपुर। एसएसपी डा. एस चनप्पा ने बताया कि इस केस में पुलिस की तरफ से ठोस विवेचना और कोर्ट में मजबूत पैरवी की गई। वारदात के बाद तमाम साक्ष्य जुटाए, जो आरोपियों को सजा दिलाने में कारगर रहे।