सहारनपुर। शिवालिक के जंगलों में अब तेंदुए की तादाद का पहली बार आकलन किया जाएगा। शिवालिक के जंगलों में 50 से अधिक तेंदुए की मौजूदगी की बात सामने आई है। जिसे शिवालिक वन परिक्षेत्र के अफसर तस्दीक करना चाहते हैं । डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड) भी कैमरा ट्रैप सहित अन्य वैज्ञानिक विधियों से गणना करने जा रहा है। तेंदुए के मूवमेंट को लेकर जंगल में आने वाली दुश्वारियों को भी दूर करने का दीर्घकालीन प्लान तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में तेंदुए की तादाद बढ़ सके और वे लंबी दूरी का सफर तय कर सकें। गणना की तिथि हालांकि तय नहीं हुई है, लेकिन इसे जल्द फाइनल कर दिया जाएगा।
सहारनपुर का शिवालिक वन परिक्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व के धौलखंड, चीलावाली रेंज और मोहंड से लगता है। मोहंड रेंज का आधा हिस्सा उत्तरप्रदेश तो आधा उत्तराखंड में है। वन्य जीवों के लिए राजाजी टाइगर रिजर्व माकूल है। राजाजी में तेंदुए अपनी तादाद बढ़ा रहे हैं और वह सहारनपुर के शिवालिक वन परिक्षेत्र की ओर अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। सहारनपुर के शिवालिक वन परिक्षेत्र के वन संरक्षक वीके जैन ने जंगल में तेंदुए की बढ़ती चहल-कदमी को लेकर विशेष योजना के तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएफ से विशेष खाका तैैयार कर तेंदुए की मौजूदगी के आकलन करने की बात कही है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 50 तेंदुआ इस वन क्षेत्र में विचरण कर रहे हैं। आकलन की रिपोर्ट आने के बाद उच्च अधिकारियों और डब्ल्यूआईआई देहरादून को जानकारी दी जाएगी।
गुर्जरों को पुनर्वासित करने की योजना
शिवालिक वन परिक्षेत्र में वन गुर्जरों का डेरा है। तेंदुआ की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। जिससे मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ती जा रही है। वन गुर्जरों को पुनर्वासित करने की योजना भी विभाग शुरुआत दौर में विचार विमर्श कर रहा है ताकि वन्य जीवों के लिए मूवमेंट करने के लिएजगह भी मिल सके और वन गुर्जरों को उनके जीवन यापन के लिए जगह भी मिल जाए।
डेढ़ साल में पांच तेंदुआ छोड़ा गया
शिवालिक वन परिक्षेत्र के जंगल की स्थिति दो सालों से सुधर रही है। मांसाहारी वन्य जीवों के लिए चीतल, सांभर सहित अन्य वन्य जीव अच्छी तादाद में मौजूद हैं। लिहाजा मेरठ, हापुड़, नोएडा, बिजनौर और गाजियाबाद से डेढ़ साल के भीतर तेंदुए को लाकर शिवालिक के वन क्षेत्र में छोड़ा गया है।
शिवालिक वन परिक्षेत्र में तेंदुए की चहल कदमी अच्छी बात है। तेंदुआ की सुरक्षा को लेकर भी खाका तैयार किया जा रहा है। तेंदुए की मौजूदगी की वजह से विशेष प्लानिंग के तहत काम किया जा रहा है। लंबी सोच और वन क्षेत्रों को विकसित करने के मकसद से लाइन ऑफ एक्शन पर काम किया जा रहा है। मानवीय दखल वनों में बहुत है। इन बातों पर भी गौर किया जा रहा है। विलंब से ही सही सुखद परिणाम आएगा।
वीके जैन, वन संरक्षक, शिवालिक वन परिक्षेत्र, सहारनपुर