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Saharanpur News: फर्म ने बंद किया सॉफ्टवेयर, टैक्स विभाग का कामकाज ठप

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नगर निगम का टैक्स अनुभाग।
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- शासन स्तर से होना था भुगतान, नगर निगम नहीं निकाल पा रहा नए बिल, टैक्स भी जमा नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। शासन ने जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम) सर्वे करने वाली फर्म का भुगतान नहीं किया है। ऐसे में फर्म ने सॉफ्टवेयर ही बंद कर दिया। इसकी वजह से नगर निगम न तो जीआईएस सर्वे आधारित बिल निकाल पा रहा है और न ही बिल जमा हो पा रहे हैं। ऐसे में गृहकर एवं जलकर अनुभाग का कामकाज दो महीने से ठप है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
दरअसल, नगर निगम क्षेत्र में गृहकर एवं जलकर के दायरे में आने वाली संपत्तियों का शासन द्वारा जीआईएस सर्वे कराया गया है। इसके लिए शासन स्तर से ही फर्म तय की गई थी। सर्वे में 2.13 लाख संपत्तियां चिह्नित की गईं, जिनको टैक्स के दायरे में लाया गया, जबकि उससे पहले वर्ष 2015 में हुए सर्वे के आधार पर करीब 1.42 लाख संपत्तियां ही टैक्स के दायरे में थीं। बहरहाल, फर्म ने सर्वे किया है, लेकिन शासन ने अभी तक फर्म का भुगतान नहीं किया है। इसकी वजह से फर्म ने अपना वह सॉफ्टवेयर ही बंद कर दिया है, जिसमें संपत्तियों का ब्योरा है। इसकी वजह से नगर निगम का गृहकर एवं जलकर अनुभाग जीआईएस सर्वे आधारित नए बिल जारी नहीं कर पा रहा है। न ही जीआईएस सर्वे आधारित बिल जमा हो पा रहे हैं। दो महीने से गृहकर एवं जलकर अनुभाग के अधिकारी और कर्मचारी खाली हैं। कर अधीक्षक सुधीर शर्मा का कहना है कि सॉफ्टवेयर जल्द खुलेगा, जिसके बाद काम आगे बढ़ेगा।
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सीएसआर फंड से बैंक करेगा भुगतान
नगर निगम अधिकारियों की एक निजी बैंक के अधिकारियों से बात चल रही है। नगर निगम की मांग है कि बैंक अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से सर्वे करने वाली फर्म का भुगतान करे, जिससे कि सॉफ्टवेयर खुल सके और नगर निगम का गृहकर एवं जलकर अनुभाग की ठप हुई व्यवस्था पटरी पर लौट सके। विभागीय सूत्रों ने बताया कि बैंक अधिकारी राजी हो गए हैं। सीएसआर फंड से फर्म का भुगतान होने के बाद सॉफ्टवेयर खुल जाएगा।
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जीआईएस सर्वे पर सवाल
जीआईएस सर्वे आधारित व्यावसायिक भवनों के बिल करीब डेढ़ वर्ष पहले जारी किए गए थे। टैक्स में दस से 20 गुणा तक वृद्धि होने पर उद्यमियों और व्यापारियों ने नगर निगम में प्रदर्शन किया था। इसके बाद नगर निगम बैकफुट पर आया था। इसके बाद नगर निगम ने स्वकर प्रपत्र प्रणाली लागू की, जिसके बाद सभी ने स्वकर प्रपत्र भरकर अपने अनुसार टैक्स जमा कराया है। यानी जीआईएस सर्वे यहां फेल साबित हुआ। उसके बाद जीआईएस सर्वे आधारित करीब 72 हजार आवासीय भवनों के बिल जारी किए गए थे।
भवनों की संख्या
भवनसंख्या
कुल भवन2.13 लाख
व्यावसायिक-38,000
आवासीय-1.45 लाख
अन्य संपत्ति30,000
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