सहारनपुर के गांव कुम्हारहेड़ा में पिछले चार साल से संचालित फायरिंग रेंज में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज रही है, मगर जानकार हैरानी होगी कि अति संवेदनशील माने जाने वाली यह फायरिंग रेंज बिना लाइसेंस के ही चल रही है।
जिसमें तमाम नियम और कायदों को ताक पर रखा गया है। वह तो गनीमत है कि अभी तक कोई हादसा नहीं हुआ है। डीएम पीके पांडेय ने जब से फायरिंग रेंज की फाइल देखी है, वह भी हैरान हैं। अब इस फायरिंग रेंज को नोटिस जारी कर इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
नए शस्त्र लाइसेंस धारकों और लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए फायरिंग ट्रायल के लिए नकुड़ रोड स्थित गांव कुम्हारहेड़ा में फायरिंग रेंज बनाई गई है, जो वर्ष 2013-14 से स्थापित है।
नियमानुसार फायरिंग रेंज को चलाने के लिए तमाम नियम और कायदों का पालन किया जाना जरूरी है, जिससे कोई हादसा न हो। इसके लिए डीएम की ओर से लाइसेंस जारी किया जाता है। मगर हैरत की बात यह है कि कुम्हारहेड़ा में संचालित फायरिंग रेंज बिना लाइसेंस के ही चल रही है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन डीएम इंद्रवीर सिंह यादव ने रेंज संचालक सैयद रिहान को फायरिंग रेंज बनाने की अनुमति दी थी, जिसके बाद डीएम के द्वारा लाइसेंस जारी किया जाना था।
रिहान ने फायरिंग रेंज तो बना ली, मगर डीएम की ओर से कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया और न ही रिहान ने यह जिम्मेदारी समझी कि डीएम के संज्ञान में लाकर लाइसेंस ले लिया जाए। ऐसे में पिछले करीब चार साल से लगातार कई सौ शस्त्र धारक फायरिंग रेंज में ट्रायल देते हुए फायरिंग कर चुके हैं। गनीमत है कि रेंज में अभी तक कोई हादसा नहीं हुआ है। वर्तमान डीएम पीके पांडेय ने जब फायरिंग रेंज की फाइल देखी तो यह सारा मामला खुला। उन्होंने बिना लाइसेंस के जारी फायरिंग रेंज पर हैरानी जताते हुए इसपर कार्रवाई करने की बात कही है।
प्रशासन भी कम जिम्मेदार नहीं
वर्ष 2013-14 में जिस समय फायरिंग रेंज स्थापित हुई थी। तब ही से प्रशासन रेंज का इस्तेमाल करता आ रहा है। तत्कालीन डीएम इंद्रवीर सिंह यादव ने पूर्व राज्य मंत्री संजय गर्ग और तत्कालीन नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला के साथ फायरिंग रेंज का उद्घाटन किया था, मगर लाइसेंस जारी करना वह भूल गए।
साथ ही उनके बाद यहां डीएम रहे पवन कुमार और शफकत कमाल ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा आयुध विभाग से संबंधित कर्मचारियों ने भी इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई है।
वर्तमान डीएम की सक्रियता के चलते रेंज के पास लाइसेंस न होने का पता चल सका है। उधर, फायरिंग रेंज बनने के दिन से गांव के लोग रेंज बनने का विरोध करते आ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मजदूर और चारा लेने के लिए महिलाएं फायरिंग रेंज की ओर जाने से बचती हैं। इतना ही नहीं, लोग अपने मवेशी तक फायरिंग रेंज के आसपास नहीं चराते हैं।
पुलिस के स्तर से लटकी है फाइल
फायरिंग रेंज चला रहे सैयद रिहान का दावा है कि उसके पास भले ही लाइसेंस नहीं है, मगर तत्कालीन डीएम इंद्रवीर के साथ ही उनके बाद डीएम रहे पवन कुमार और शफकत कमाल की रेंज को चलाने की लिखित अनुमति उनके पास है। स्वीकार किया कि रेंज में पहले कुछ कमियां थीं। आरआई ने दीवारें ऊंची कराने और दीवार के दोनों ओर मिट्टी लगवाने को कहा था। नियम पूरे कर फाइल पुलिस विभाग को भेजी गई थी। मगर पुलिस विभाग फाइल को आगे नहीं बढ़ा रहा है। उन्होंने पुलिस लाइन में कराई जा रहे फायरिंग टेस्ट को भी हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया। रिहान ने प्रशासन से नोटिस मिलने की बात स्वीकार की है।
फायरिंग रेंज बिना लाइसेंस के चल रही यह बात हैरान करने वाली है। मुझे इसकी जानकारी भी नहीं है। रही बात फायरिंग ट्रायल की तो पिछले कुछ समय से हम शस्त्र धारक को फायरिंग के ट्रायल के लिए कुम्हारहेड़ा नहीं भेज रहे हैं। हम उनका ट्रायल पुलिस लाइन में ही ले रहे हैं।
बबलू कुमार, एसएसपी।
गांव कुम्हारहेड़ा में चल रही फायरिंगरेंज पूरी तरह गलत बनी है, जिसका कोई लाइसेंस डीएम की ओर से जारी नहीं किया गया है, जो हैरान करने वाली बात है। फर्जी रूप से चल रही फायरिंग रेंज के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है।
पीके पांडेय, डीएम।