जल गया घर और दहेज का सामान, कैसे होगी बेटियों की शादी
शाकंभरी। खुवाशपुर उर्फ हबीबपुर तपोवन में बुधवार शाम आग के तांडव ने कई अरमानों का कत्ल कर दिया। अब लोगों को चिंता सता रही है कि बेटी के हाथ कैसे पीले होंगे। सिर से छत तो छिन ही गई, जमा पूंजी और दहेज का सामान भी जल गया।
आग से घर जलने की खबर मिलने पर जब रईसा का भाई मिलने पहुंचा, तो रईसा के आंसू छलक पड़े। वह भाई के गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बताया कि घर के साथ बेटियों की शादियों के लिए इकट्ठा किया गया सामान और जमा पूंजी भी राख हो गई। अब बेटी की शादी कैसे होगी, वह कहां रहेगी। खाने के लिए भी पैसे नहीं हैं। रईसा का शौहर और बेटे मजदूरी करते हैं। बेटे मुख्त्यार ने गेहूं की कटाई करके और बटाई पर जमीन लेकर 40 कुंतल गेहूं अपनी दो बहनों महरून और खुशनसीब की शादी के लिए इकट्ठा किया था। जो जेवर बनवाया था, वह भी आग की भेंट चढ़ गया। उसके शौहर लॉकडाउन से पहले भैंसों का व्यापार करने घर से निकले थे। वह दिल के मरीज हैं और उत्तराखंड के मंगलौर में फंसे हुए हैं। वहां से उन्होंने 60 हजार रुपये दोनों बेटियों की शादी का सामान खरीदने के लिए भेजे थे, वह भी आग में जल गए। अब कुछ नहीं बचा। रईसा के साथ ही दोनों बेटियां भी बदहवास हालत में थीं। पूरी रात खुले आसमान के नीचे ही बिताई। अन्य परिवारों का भी बुरा हाल था। दोपहर के समय बिना छत सब धूप में झुलस रहे थे, लेकिन कोई सरकारी मदद इन गरीबों तक नहीं पहुंची थी।