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नगर निगम कर्मचारी से मारपीट पर भड़का गुस्सा, हंगामा

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नगर निगम कर्मचारी से मारपीट पर भड़का गुस्सा, हंगामा
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सहारनपुर। सैनिटाइजेशन के लिए जाते समय नगर निगम के कर्मचारी से अभद्रता और मारपीट करने पर कर्मचारियों ने बुधवार दोपहर सदर कोतवाली में हंगामा कर दिया। उन्होंने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नेता और कुछ अन्य संगठनों से जुड़े एक पदाधिकारी चौधरी नीरपाल सिंह पर अभद्रता, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। हंगामा बढ़ता देखकर पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा, कर्मचारी से मारपीट और एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
बुधवार दोपहर नगर निगम के कर्मचारी काफी संख्या में वाहनों के साथ सदर कोतवाली पहुंचे। वाहनों को सदर रोड पर खड़ा करने के बाद उन्होंने इस घटना पर रोष जताया। नगर निगम के कर्मचारी भीम सागर ने बताया कि वह गाड़ी चालक है। वह और उसके अन्य साथी सैनिटाइजेशन के लिए दिल्ली रोड पर सरस्वती विहार स्कूल जा रहे थे। रास्ते में कमिश्नर कार्यालय के पास पीछे से एक कार ओवरटेक करते हुए आगे आई। आरोप है कि कार में सवार पंजाबी बाग निवासी चौधरी नीरपाल ने कार को साइड न देने की बात कहकर भीम सागर के साथ अभद्रता की। विरोध करने पर गाड़ी से उतारकर मारपीट की। चालक और हेल्परों के लिए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और जान से मारने की धमकी दी।
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निगम के कर्मचारियों को जब यह पता चला तो उनमें रोष उत्पन्न हो गया। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान वे कोरोना योद्धा के रूप में सेवा में लगे हुए हैं। लेकिन कई बार उनके साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे मामलों को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कार्य बहिष्कार कर आंदोलन की चेतावनी दी। इस बीच, पुलिस के आश्वासन और नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके त्रिपाठी ने कर्मचारियों को शांत कर लौटाया। बाद में कर्मचारी पुलिस लाइन भी पहुंचे। हंगामा करने वालों में कर्मचारी नेता सोनी आजाद वाल्मीकि, बृजमोहन, धीरज आजाद, अमन, सुनील, सोमपाल, रोमी कुमार, गौरव, विकास कुमार, चंचल, अनवर, अमित बिरला, राजकमल गहलोत आदि शामिल रहे। वहीं, देर शाम पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया। कर्मचारियों के दोबारा हंगामे से बचने के लिए पुलिस ने यह कार्रवाई आनन फानन में निपटाई।
वहीं, इससे पहले फोन पर बातचीत में चौधरी नीरपाल सिंह ने कहा कि इस प्रकरण में उनकी बात नहीं सुनी गई। साइड देने को लेकर विवाद हुआ था। मगर जितना मामला बताया गया है, उतना नहीं है।
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वर्जन
- सैनिटाइजेशन करने के लिए कर्मचारी अपने रूट पर जा रहा था। तभी साइड मारने को लेकर विवाद हुआ। बड़ी गाड़ी होने के कारण साइड नहीं दी जा सकी। गाड़ी रुकवाकर कर्मचारी से अभद्रता की गई। उसे पीटा गया। उसे जातिसूचक शब्द कहे गए। कोरोना योद्धा के रूप में काम कर रहे कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार निंदनीय है। ऐसी घटनाओं से कर्मचारियों का मनोबल टूटता है। इसलिए कर्मचारियों में रोष रहा और वे कार्रवाई के लिए कोतवाली पहुंचे थे।
- एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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