तेवर आक्रामक.. चलाए सियासी तीर... और कुरेदा किसानों का दर्द
प्रियंका गांधी ने गन्ना किसानों का जिक्र कर वेस्ट यूपी की नब्ज पर रखा हाथ
सहारनपुर। मां शाकंभरी के नाम से भाषण की शुरुआत और अंत जय जवान जय किसान से। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आक्रामक तेवरों के साथ जमकर सियासी तीर चलाए। निशाने पर भाजपा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रखा। वेस्ट यूपी की सियासी धुरी कहलाने वाले गन्ना किसानों का भी दर्द कुरेदा। लब्बोलुआब यही है कि पंचायत के जरिये वह फ्रंट फुट पर बैटिंग कर कांग्रेस को संजीवनी देने की कोशिश करती नजर आईं।
दरअसल, किसान आंदोलनों के बीच कांग्रेस की यह पहली किसान पंचायत है। इसमें प्रियंका गांधी ने वेस्ट यूपी के सियासी समीकरणों का पूरा ध्यान रखा। वेस्ट यूपी में किसानों के इर्द गिर्द राजनीति घूमती है। गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर पहले भी वेस्ट यूपी में किसान आंदोलन होते आए हैं, जिससे सियासी समीकरण बनते बिगड़ते रहे हैं। यही वजह है कि प्रियंका ने पूरा संबोधन किसानों पर ही फोकस रखा। गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर सरकार पर प्रहार किया और वादाखिलाफी का आरोप लगाया। नए कृषि कानूनों को लेकर भी वह हमलावर रहीं और वादा कर दिया कि कांग्रेस की सरकार आने पर तीनों कृषि कानून रद्द किए जाएंगे तथा एमएसपी भी दिलाया जाएगा। इन बातों के जरिये प्रियंका गांधी एक तरफ किसानों को समझाने का प्रयास करती नजर आईं कि भाजपा ने उनके साथ धोखा किया है और भाजपा किसानों के हित में कार्य नहीं कर रही है। वहीं कांग्रेस को खुद को हमदर्द बताते हुए किसानों को साधने की पूरी कोशिश करती दिखीं।
20 मिनट का रहा भाषण
प्रियंका गांधी 3:20 बजे चिलकाना पंचायत में पहुंची। ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के बाद 3:35 बजे मंच पर पहुंची। 4 बजे संबोधन शुरू किया और 4:20 पर समाप्त कर दिया।