‘कन्या भ्रूण हत्या है सबसे बड़ा पाप’
गंगोह (सहारनपुर)। कथावाचक ने कन्या भ्रूण हत्या को सबसे बड़ा पाप बताते हुए कहा कि इससे कई जन्मों में भी मुक्ति नहीं मिल सकती। प्रभु का स्मरण करने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। इस दौरान शालिग्राम और तुलसी का विवाह संपन्न कराया गया।
नगर के मोहल्ला ईशरा के होली चौक पर चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में कथावाचक नंद किशोर गोस्वामी ने कंस वध और रुक्मणी विवाह के प्रसंग की लीला का वर्णन किया। कथा प्रसंग के दौरान कथा व्यास ने कहा कि कन्यादान दुनिया में सबसे बड़ा दान है। उनका कहना था कि यदि मनुष्य अपना सर्वस्व भी दान कर दे तो भी कन्यादान के समकक्ष पुण्य अर्जित नहीं कर सकता। इसके विपरीत कथा वाचक ने कन्या भ्रूण हत्या को सबसे बड़ा पाप बताते हुए कहा कि इससे कई जन्मों में भी मुक्ति नहीं मिल सकती। उनका कहना था कि जीवन और मृत्यु ईश्वर के अधीन है, मानव को इससे छेड़छाड़ करने का कोई हक नहीं है।
इससे पूर्व शालिग्राम का तुलसी के साथ विधिवत विवाह संपन्न कराया। इस दौरान तुलसी पक्ष के लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य किया। पूरे धार्मिक रीति रिवाज से विवाह संपन्न कराया गया। पंडित नंद किशोर गोस्वामी, यजमान त्रिभुवन तायल, अशोक गोयल, प्रवीण ऐरन ने अपने परिवार के साथ मंत्रोच्चारण करते हुए यज्ञ संपन्न कराया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने आहुतियां डाली। यज्ञ के बाद विधिवत फेरों की रस्म अदा की गई और दान दहेज देकर उन्हें विदा किया गया। इस मौके पर राकेश गोयल, राकेश मित्तल, विजय गर्ग, मनीष, नितिन, कार्तिक, अखिल, वरुण, सागर, सौरभ, गौरव, अंकित कुमार, सुरेंद्र, मोहन लाल, प्रदीप, दिनेश, राधा, अनीता, शगुन, रेखा, उमा, सुशीला, पंकज, कौशिल्या रानी, सरला, काजल, अनीता शर्मा, मंजू रानी, कमलेश, बबीता, गरिमा, पूजा, सुरभि बंसल, सुनीता, मीनू, स्वाति, अंजू महेश्वरी, प्रिया बंसल, छवि, मंजू, दिव्या, अनुराधा, कुसुम, बाला देवी, मिथलेश, मनीषा, सोनिया, पायल बंसल, शाश्वत बंसल आदि शामिल रहे।