सहारनपुर की स्मार्ट सिटी योजना के तहत दूसरे चरण के टॉप शहरों में जगह बनाने के लिए सहारनपुर प्रयासरत है। योजना के तहत जनता से सुझाव लेने के लिए नगर निगम ने जन सहभागिता कार्यक्रम चलाया हुआ है।
जनता से सुझाव लेने की शुरूआत बुधवार से शुरू कर दी गई है, जिसके लिए शहर में तीन जगहों पर कैंप लगाए गए। दुख की बात यह है कि सुझाव देने के लिए लोगों ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई। आलम यह रहा कि कुछ कैंप में कर्मचारी सुझाव के लिए लोगों के आने का इंतजार करते रहे।
दिनभर बैठे रहने के बावजूद सौ के आसपास ही सुझाव मिल सके। यदि लोगों का यही रवैया रहा तो दूसरे चरण में भी शहर का चयन हो पाना मुश्किल रहेगा।
योजना के तहत पहले चरण में सहारनपुर को 72 हजार सुझाव प्राप्त करने का लक्ष्य मिला था, जिसे हासिल करने में नगर निगम को एक महीने से अधिक का समय लग गया था।
मगर प्रस्ताव में अनेक खामियों की वजह से सहारनपुर को चुनिंदा 20 शहरों में स्थान नहीं मिल सका था। इसके बाद केंद्र सरकार ने सहारनपुर को एक और मौका देते हुए अपने प्रस्ताव को संशोधित कर 15 जून तक दाखिल करने को कहा था।
नगर निगम ने काफी हद तक प्रस्ताव में संशोधन कर लिया है, मगर सहारनपुर को इस बार साढ़े तीन लाख सुझाव का लक्ष्य मिला है, जो 15 जून तक हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है।
इस बार नगर निगम ने सुझाव लेने के लिए लखनऊ और चंडीगढ़ की दो फर्मों को अधिकृत किया है, जो शहर में अलग-अलग जगहों पर कैंप लगाकर लोगों से सुझाव इकट्ठा करेंगी।
बुधवार को कैंप का पहला दिन था। इसमें कलक्ट्रेट परिसर, दीवानी कचहरी परिसर और हकीकत नगर स्थित बड़ा मंदिर पर कैंप लगाया गया। नगरायुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने अपनी टीम के साथ कैंपों का भ्रमण किया।
दीवानी कचहरी में अधिवक्ताओं ने सुझाव देने में थोड़ी दिलचस्पी दिखाई, मगर कलक्ट्रेट परिसर में लगे कैंप में लोगों का इंतजार होता रहा। पूर्वाह्न 11 बजे से शाम पांच बजे तक यहां मुश्किल से सौ लोग ही सुझाव दे सके थे।
यानी एक दिन में तीन कैंप में सुझावों की संख्या करीब पांच सौ रही। कैंप 12 दिन तक चलने हैं। ऐसे में साढ़े तीन लाख सुझाव का लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन सा नजर आ रहा है। ऐसे में नगर वासियों को भी अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा।