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टिडडी दल के प्रकोप की आशंका बढी, 11 नियंत्रण कक्ष बनाए

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टिड्डी दल के प्रकोप की आशंका बढ़ी, 11 नियंत्रण कक्ष बनाए
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सहारनपुर। दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना को देखते हुए जनपद में भी एलर्ट हो गया है। कृषि रक्षा विभाग ने इसके लिए जिले में 11 नियंत्रण कक्ष स्थापित कर उनके प्रभारी नियुक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि किसान टिड्डी दल के आने की तत्काल सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायकों और ग्राम पंचायत अधिकारी को दें।
टिड्डी दल के प्रकोप की आशंका ने जनपद के अधिकारियों और किसानों की पेशानी पर पसीना ला दिया है। टिड्डी दल बड़ी संख्या में एक साथ चलता है। ये फसलों की हरी पत्तियों को खाकर चट कर देता है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिप्रा ने बताया कि टिड्डी दल का जिस भी क्षेत्र में हमला होता है, वहां पर फसलों को भारी नुकसान होता है। जिले के सभी 11 विकास खंडों में नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। उन्होंने किसानों को इससे बचाव के टिप्स दिए हैं। उन्होंने कहा कि टिड्डी दल का प्रकोप होने पर किसानों को एक साथ मिलकर टीन के डिब्बों, थालियां डीजे आदि को बकर शोर मचाकर टिड्डियों को उड़ा देना चाहिए। टिड्डी दल के प्रकोप वाले क्षेत्र में जुताई करनी चाहिए। इसके अलावा क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी, क्युनॉलफॉस 25 प्रतिशत, लेम्डासाइहैलोथ्रीन 5 प्रतिशत, साइपैरमैथरीन 25 प्रतिशत, प्रोफेनोपफॉस 50 प्रतिशत या मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की दो से तीन एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर सामूहिक रूप से स्प्रे करना चाहिए
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केवीके ने भी किसानों को चेताया
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने टिड्डी के प्रकोप की आशंका को देखते हुए किसानों को जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि सूचनाओं के अनुसार टिड्डी दल के शनिवार शाम तक हरियाणा के गुरुग्राम होते हुए दिल्ली पहुंचने की आशंका है। टिड्डियों का दल हवा के बहाव की दिशा में एक दिन में करीब 100 किलोमीटर तक की दूरी तय करता है। ऐसे में इसके एक दो दिनों में जनपद में पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। इसको लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसानों को टिड्डी दल की उपस्थिति देखाई दे तो तुरंत इसकी सूचना मुख्य विकास अधिकारी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, कृषि विभाग, गन्ना विभाग, उद्यान विभाग के अधिकारियों और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को दें। जिससे समय से इन पर नियंत्रण के लिए कार्रवाई की जा सके।
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