सहारनपुर। कैबिनेट की बैठक में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने के फैसले की अधिवक्ताओं ने सराहना की। अधिवक्ताओं का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने से पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलेगा। जनपद में पॉक्सो कोर्ट में लगभग 589 मुकदमे विचाराधीन हैं। इनमें दुष्कर्म के लगभग 150 मामले हैं।
सहारनपुर अधिवक्ता बार संघ एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर त्यागी का कहना है कि वास्तविक मामलों में पीड़िता को त्वरित न्याय मिलना बेहद जरूरी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से रोजाना सुनवाई होगी और जल्द न्याय मिलेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अध्यक्ष अरविंद शर्मा का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के साथ ही न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी को दूर किया जाए। रिक्त पदों को भी भरना जरूरी है। ताकि पीड़ितों को न्याय मिलने में दिक्कत न हो। अधिवक्ता और पूर्व सचिव अनुराग गुप्ता का कहना है कि कुछ मामले संदिग्ध होते हैं, जिनकी वजह से अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ता है। इससे न्यायालय का कीमती समय नष्ट होता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से मामलों का जल्द निस्तारण होगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा। अधिवक्ता सूर्य प्रकाश शर्मा और नलनीश गर्ग का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से त्वरित न्याय मिलेगा, लेकिन न्यायिक अधिकारियों के अवकाश और हड़ताल को भी ध्यान में रखने की जरूरत है। सहायक शासकीय अधिवक्ता मेघराज सैनी, विक्रम सिंह वर्मा का कहना है कि सहारनपुर में पॉक्सो एक्ट के 500 से अधिक मुकदमे लंबित हैं, जबकि पॉक्सो एक्ट में 150 मुकदमों पर एक कोर्ट का प्रावधान है। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाना सराहनीय है, लेकिन अधिवक्ताओं की समस्याओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
एडवोकेट मेघराज सैनी- फोटो : SAHARANPUR
एडवोकेट नलनेश गर्ग- फोटो : SAHARANPUR
एडवोकेट अरविन्द शर्मा- फोटो : SAHARANPUR
एडवोकेट विक्रम सिंह वर्मा- फोटो : SAHARANPUR
एडवोकेट अनुराग गुप्ता- फोटो : SAHARANPUR
सिद्घार्थ शंकर त्यागी- फोटो : SAHARANPUR