तीतरों। एनएचआई के अधिकारियों ने बुधवार को कलसी में धरनारत किसानों के बीच पहुंच निर्माणाधीन शामली-अंबाला हाईवे का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए किसानों से 500 मीटर भूमि पर कब्जा देने की मांग की, लेकिन किसानों ने मुआवजे के बगैर एक इंच भूमि भी देने से साफ इंकार कर दिया।
दोपहर के समय एसडीएम नकुड़ संगीत राघव के साथ पहुंचे अधिकारियों ने धरनारत किसानों और भाकियू पदाधिकारियों से वार्ता की। इसमें भाकियू के राष्ट्रीय सचिव विनय कुमार ने बताया कि अंडरपास की ऊंचाई शर्तों के मुताबिक नहीं की गई है तथा हाईवे के निर्माण के दौरान किसानों की भूमि ज्यादा अधिग्रहित की गई है, जबकि थ्रीडी सूची में कम दर्शायी गई है।
भूमि पर कब्जा लेने के दौरान चार किसानों की फसलें बर्बाद हो जाने के बाद उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि हाईवे को गांव व खेतों से जोड़ने के लिए सर्विस रोड का निर्माण करने का समझौता हुआ था, लेकिन सर्विस रोड के लिए भूमि चिन्हित नहीं की गई है।
इस पर एसडीएम ने एनएचआई लेखपाल को फटकार लगाई। कहा कि राजस्व विभाग के लेखपालों के साथ भूमि की पैमाइश करने के बाद किसानों को उनकी भूमि के वास्तविक रकबे की पैमाइश से अवगत न कराया जाना गंभीर लापरवाही है।
उन्होंने दो दिन में रिपोर्ट एसडीएम न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसी बीच हाईवे अथाॅरिटी के अधिकारियों ने किसानों को दो तरफ 250-250 मीटर भूमि उन्हें सौंपे जाने की मांग की, जिससे निर्माण कार्य पूरा किया जा सके। धरनास्थल पर मौजूद भाकियू पदाधिकारियों व किसानों ने साफ इंकार कर दिया।
इस दौरान तहसीलदार जसमेंद्र सिंह, भाकियू मंडल अध्यक्ष अशोक चौधरी, जिलाध्यक्ष नरेश स्वामी, जिला उपाध्यक्ष अमित मुखिया, नकुड़ तहसील अध्यक्ष सरदार लाढी सिंह आदि मौजूद रहे।
शासन ने गांव बाल्लू में की चकबंदी प्रकिया निरस्त
तीतरों। एसडीएम नकुड़ संगीता राघव ने बताया कि ग्राम बाल्लू में लागू चकबंदी प्रकिया को शासन ने निरस्त कर दिया है। उन्होंने किसानों से कहा कि आगामी दिवस में गांव में किसानों के साथ एक बैठक का आयोजन किया जाएगा। वहां के किसानों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा तथा उनकी भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं को सुना जाएगा।