सहारनपुर। फसल अपशिष्ट जलाने के मामले में प्रदेश स्तर पर घटनाएं पांच वर्षों में बढ़ी हैं, लेकिन मंडल की बात करें तो सहारनपुर और मुजफ्फरनगर ने इसमें अच्छी प्रगति की है। जागरुकता बढ़ने और कई विकल्पों के चलते यहां पर फसल अपशिष्ट जलाने की घटनाओं में कमी आई है, जबकि शामली में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फसल अपशिष्ट को जलाने से रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सैटेलाइट के माध्यम से जहां भी अधिक ऊष्मा वाले स्थान का पता चलता है, तो जिले में गठित टीम मौके पर जाकर पड़ताल करती है।
यदि फसल अपशिष्ट जलाने की पुष्टि होती है। तब संबंधित किसान या व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा इस वर्ष की 15 सितंबर से 30 नवंबर तक की रिपोर्ट जारी की गई है।
रिपोर्ट में सहारनपुर जिले में इस वर्ष कुल 23 फसल घटनाओं की जानकारी मिली। टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की तो चार में जुर्माना लगाया गया। 17 घटनाएं ऐसी मिली, जो फसल अपशिष्ट या फिर अन्य श्रेणी में नहीं पाई गई। टीम ने चार किसानों के ऊपर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसी तरह शामली में इस वर्ष कुल 58 घटनाएं दर्ज की गई। मुजफ्फरनगर में 42 घटनाएं दर्ज हुई।