गंगोह (सहारनपुर)। क्षेत्र में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बाजार में लगातार बनी मंदी ने सब्जी उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को खुद ही ट्रैक्टर से रौंदने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा और गिरते दामों ने उन्हें भारी आर्थिक संकट में धकेल दिया है।
किसान राशिद मलिक ने खेत में ट्रैक्टर से शिमला मिर्च की फसल नष्ट करते हुए रुंधे गले से बताया कि किसान फसल को अपने बच्चे की तरह पालता है। महीनों की मेहनत, दिन-रात की देखभाल और उम्मीदों के सहारे तैयार हुई फसल को अपने ही हाथों बर्बाद करना किसी दर्द से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बार करीब 12 बीघा में शिमला मिर्च की खेती की थी, जिसमें लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत आई थी, लेकिन ओलावृष्टि और मंडियों में बेहद कम दाम मिलने से सबकुछ बर्बाद हो गया।
राशिद मलिक ने कहा कि मंडी में शिमला मिर्च का भाव मात्र साढ़े चार रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि मजदूरी और गाड़ी किराया भी नहीं निकल पा रहा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी पत्ता गोभी और फूल गोभी की फसल मंदी के कारण ट्रैक्टर से नष्ट करनी पड़ी थी, लेकिन सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिली। वहीं किसान शाहिद ने बताया कि ठेके पर जमीन लेकर खेती करने के बावजूद लगातार नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता और सब्जी उत्पादकों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है।