संवाद न्यूज एजेंसी
छुटमलपुर। देहरादून में बादल फटने की घटना में लापता हुए छह मजूदरों के परिजन पथराई आंखों से उनके सुरक्षित लौटने की राह देख रहे हैं। हादसे को 40 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन उनकी कोई खबर नहीं मिल सकी है। घर के पुरुष सदस्य उनकी तलाश में देहरादून के प्रभावित क्षेत्र में डेरा जमाए हुए हैं।
रसूलपुर कलां ग्राम पंचायत के मजरे मीरपुर निवासी मिथुन, उसके चाचा श्यामलाल, धर्मेंद्र और विकास सात सितंबर को घर से देहरादून के माल देवता में पत्थर तुड़ाई के काम पर निकले थे। परिजनों ने बताया कि उन्हें गंदेवड़ा गांव का एक ठेकेदार अपने साथ ले गया था। बादल फटने की घटना के बाद परिजन कुछ ग्रामीणों के साथ देहरादून पहुंचे थे, लेकिन कोई पता नहीं चला। बुधवार को फिर से ग्राम प्रधान पति सुशील उपाध्याय के साथ परिजन देहरादून पहुंचे, लेकिन देर शाम तक भी किसी का पता नहीं चल सका था।
n मिथुन की बेटियां पूछती हैं कब आएंगे पापा और बाबा : लापता हुए श्यामलाल और मिथुन सगे चाचा भतीजे हैं। श्यामलाल की कोई संतान नहीं है। मिथुन की पत्नी ने बताया कि श्यामलाल ही उनके ससुर की तरह हैं। मिथुन के पांच बेटियां हैं। बेटा कोई नहीं है। सबसे बड़ी साक्षी 15 साल और सबसे छोटी मात्र डेढ़ साल की है। उस मासूम को तो पता भी नहीं कि उसके पिता हादसे में लापता हो गए हैं। परिवार के दो लोगों के लापता होने के बाद यहां रिश्तेदारों, पड़ोसियों की भीड़ लगी थी।
हर कोई उन्हें दिलासा दे रहा है। बेटियां मां से हर वक्त पूछती रहती हैं कि पिता और बाबा कब लौटेंगे, लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं।