सहारनपुर। बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की म्हाड़ी पर भरने वाले तीन दिवसीय मेले में प्रसाद और निशान चढ़ाने श्रद्धालु का सैलाब उमड़ पड़ा। दिन भर बारिश होती रही, लेकिन बारिश पर आस्था भारी पड़ी। नेजे की अगुवाई में सभी 26 छड़ियां बैंडबाजों और ढोल के साथ म्हाड़ी पर पहुंची। मौसम खराब होने की वजह से हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा नहीं हो सकी है।
शुक्रवार बैंडबाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ छड़ियां मेला गुघाल पुल के नीचे बनाए स्थान पर एकत्र हुई। यहां पर मुख्य अतिथि के रूप में आध्यात्मिक गुरु दीपांकर महाराज शामिल हुए और पूजा अर्चना की। यहां पर नेजा जी और छड़ियों पर मशीन से पुष्प वर्षा की गई। इसके पश्चात नेजे की अगुवाई में महानगर तीन किलोमीटर दूर गंगोह रोड स्थित श्री गोरखनाथ और श्री जाहरवीर गोगाा म्हाड़ी पर रंग-बिरंगे परिधान से सजी छड़ियां बारिश के बीच प्रस्थान कर गई। छड़ियों के म्हाड़ी पर पहुंचते ही बाबा श्री जाहरवीर और गुरु गोरखनाथ के जयकारे गूंज उठे। नेजे और छड़ियां अपने-अपने स्थानों पर खड़ी हो गई।
रात भर पहुंचते रहे श्रद्धालु, डीआईजी ने लिया सुरक्षा का जायजा
छड़ियों के पहुंचने पर पूजा अर्चना के साथ म्हाड़ी पर भंडारे शुरू हो गए। रात भर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, पश्चिमी यूपी और जिले के श्रद्धालु निशान और प्रसाद चढ़ाने पहुंचते रहे। श्री गुग्गा म्हाड़ी सुधार सभा के चौधरी अनिल प्रताप सैनी ने बताया कि मौसम खराब होने की वजह से हेलीकाप्टर पुष्प वर्षा नहीं हो सकी। श्री शिव गोरख जाहरवीर सेवा समिति संस्थापक पंकज उपाध्याय ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात 12 बजे से लेकर शुक्रवार की देर रात तक करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पहुंचकर बाबा आशीर्वाद लिया। वहीं, डीआईजी अजय कुमार साहनी और एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक ने सुरक्षा व्यवस्था जायजा लिया।
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900 वर्ष पूर्व दिया था नेजा, सरसावा में है बाबा की ननिहाल
900 वर्ष पूर्व बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज ने हरिद्वार जाते हुए गंगोह रोड पर अपनी सेना के साथ पड़ाव डाला था। तब, उन्होंने कबली भगत को तालाब से मछली पकड़ते देखा था। कबली भगत ने अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराया था। बाबा ने कहा था कि इस काम बंद कर दे। तब, बाबा ने कबली को नेजा देकर कहा था कि यहां म्हाड़ी बनवाकर मेला भरवाए, उसकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। तभी से मेला भरता आ रहा है। छड़ियों के भक्तों ने बताया कि बाबा श्री जाहरवीर का जन्म राजस्थान के चुरू जिले के गांव ददरेगा में हुआ था। चुरु जिले का नाम बाद में राजगढ़ हो गया। इनके पिता जेवर सिंह और माता बाछल थीं। बताते हैं कि श्री जाहरवीर गोगा के जन्म से पूर्व उनके पिता जेवर सिंह को बाबा गुरु गोरखनाथ ने आशीर्वाद देकर कहा था कि तुम्हारे घर ऐसा पुत्र जन्म लेगा, जो धर्म की रक्षा करेगा। तब माता बाछल ने पुत्र को जन्म दिया, जिनका नाम श्री जाहरवीर रखा गया। प्राचीन काल में सहारनपुर के कस्बा सरसावा का नाम सिरसा पट्टन था और श्री जाहरवीर गोगा महाराज की माता बाछल यहीं की रहने वाली हैं। वह राजा कुंवरपाल की पुत्री थी।