इनकम टैक्स भी हजम कर रहा था फैक्टरी प्रबंधन
सहारनपुर। शराब फैक्टरी से जिस तरह फर्जी बिल्टी पर शराब निकाली जा रही थी, उससे ना सिर्फ एक्साइज ड्यूटी की चोरी हो रही थी, बल्कि इनकम टैक्स विभाग को भी चूना लगाया जा रहा था। जो शराब बगैर रिकार्ड के बनाकर बेची जा रही थी, उससे होने वाली आय का भी कोई रिकार्ड नहीं बन रहा था। माना जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग भी जांच कर सकता है।
टपरी स्थित दि को-ऑपरेटिव कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शराब फैक्टरी से देशी और अंग्रेजी दोनों तरह की शराब बनाई जा रही थी। एसटीएफ की टीम ने तीन दिन पहले कंटेनर पकड़ा था, जिसमें देशी शराब शबनम अंगूरी बरामद हुई थी। एसटीएफ और आबकारी अधिकारियों के साथ ही पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले तथ्य बताए। इसी में पता चला कि फैक्टरी में बनने वाली पूरी शराब का रिकार्ड नहीं रखा जाता था। इस बारे में इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि आरोपी फैक्टरी मालिक, डायरेक्टर, यूनिड हेड, वाइस प्रेसीडेंट और इस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की इनकम और संपत्तियों की जांच हो सकती हैं।
कोरोना काल में भी सुर्खियों में आई थी फैक्टरी
यह शराब फैक्टरी कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान भी सुर्खियों में रही थी। तब अप्रैल 2020 में इस कंपनी ने हैंड सैनिटाइजर बनाने का लाइसेंस जारी करा लिया था और सैनिटाइजर की पैकिंग शराब के लिए इस्तेमाल होने वाले पव्वों में करा दी थी। इतना ही नहीं सैनिटाइजर का रंग भी शराब जैसा ही था। इस सैनिटाइजर की सप्लाई बरेली सहित अन्य जनपदों में भेज दी गई थी। कंपनी की इस हरकत का पता लगने पर ड्रग विभाग की टीम ने कंपनी का दौरा कर सैनिटाइजर को शराब की शीशियों में नहीं बेचने और उसका रंग बदलने के निर्देश दिए थे।
दफ्तर पहुंचे सहायक आयुक्त आबकारी
कोतवाली देहात में दर्ज हुई रिपोर्ट में आरोपी बनाए गए सहायक आयुक्त आबकारी (प्रवर्तन) जगराम पाल शुक्रवार को सहारनपुर में नवाबगंज के पास स्थित अपने कार्यालय पहुंचे। काफी देर कार्यालय में बैठकर विभागीय कार्य भी किया। आबकारी उपायुक्त आरके चतुर्वेदी का कहना है कि सहायक आयुक्त 23 फरवरी से लखनऊ गए हुए थे। वहां आबकारी सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया में उनकी ड्यूटी लगी थी।
आबकारी के रिकार्ड में डायरेक्टर है उपेंद्र गोविंद राव
कोतवाली देहात में दर्ज रिपोर्ट में प्रणव अनेजा को शराब फैक्टरी का मालिक लिखा गया है। पता चला है कि आबकारी विभाग के पास इस कंपनी के रिकार्ड में डायरेक्टरों का जिक्र है, जिसमें आरोपी उपेंद्र गोविंद राव डायरेक्टर है। उपेंद्र गोविंद राव महुअवा रामकोला कुशीनगर (यूपी) निवासी है, जबकि कंपनी मालिक दर्शाए गए प्रणव अनेजा बरेली के रहने वाले बताए जा रहे हैं। प्रणव अनेजा का दिल्ली में भी मकान बताया जा रहा है।