सहारनपुर। जिला अस्पतालों को एनक्यूएएस (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड) के मानकों पर लाने की तैैयारी शुरू हो गई है। जिला अस्पतालों में सुविधाओं को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कल्याण ने सभी जिला अस्पतालों का एनक्यूएएस का प्रमाणीकरण कराने के आदेश दिए हैं। जिन अस्पतालों का आज तक एनक्यूएएस प्रमाणीकरण नहीं हुआ है उनको तुरंत कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। पत्र प्राप्त होने के बाद से जनपद के दोनों जिला अस्पतालों में तैयारी शुरू कर दी गई है, लेकिन आधी अधूरी सुविधाओं के बीच यह प्रमाणपत्र लेना जिला अस्पतालों के लिए आसान नहीं होगा।
जनपद में एसबीडी जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल संचालित हैं। जिला अस्पताल 316 बेड का है, जबकि जिला महिला अस्पताल करीब 165 बेड का है। दरअसल, प्रमाणीकरण के लिए अस्पतालों को तमाम शर्तें पूरी करनी होती हैं, जिनके मूल्यांकन के लिए टीम अस्पताल पहुंचकर सर्वे करती है। उसके आधार पर अस्पतालों को नंबर्स दिए जाते हैं, लेकिन यहां जिला अस्पतालों के पास सुंदर और मजबूत भवन व अन्य संसाधन होने के बावजूद आज तक एनक्यूएएस प्रमाणीकरण नहीं कराया गया है। क्योंकि उसके लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ ही व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाना बेहद जरूरी है। विभागीय अधिकारी ने बताया कि प्रमाणीकरण के लिए एनक्यूएएस में अस्पतालों को कम से कम 70 फीसदी अंक लाने होते हैं। कम से कम 70 फीसदी अंक वाले अस्पतालों को अच्छा माना जाता है। उधर, बीते वर्ष कायाकल्प अभियान में एसबीडी जिला अस्पताल ने काफी बेहतर कार्य किया था, जिसके लिए प्रमाणपत्र मिला था, लेकिन अब एनक्यूएएस प्रमाणीकरण के लिए तैयारी शुरू की गई है।
पर्याप्त चिकित्सक नहीं होना बड़ी वजह
एनक्यूएएस प्रमाणीकरण के लिए जिला अस्पतालों में चिकित्सक और स्टाफ का पर्याप्त संख्या में होना जरूरी है, लेकिन यहां एसबीडी जिला अस्पताल की बात करें तो 61 सृजित पदों की तुलना में केवल 29 चिकित्सक तैनात हैं, जिनमें कई विशेषज्ञ चिकित्सक तक नहीं हैं। इसी प्रकार महिला अस्पताल में भी चिकित्सकों के 34 सृजित पदों की तुलना में 19 चिकित्सक ही तैनात हैं। अन्य स्टाफ की भी भारी कमी है।
पुराने ढर्रे पर हैं कई व्यवस्थाएं
निजी अस्पतालों में सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें हैं, जिनसे ऑपरेशन करने में मरीज को कम जोखिम होता है, लेकिन एसबीडी जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में पुराने सर्जरी की व्यवस्था पुराने ढर्रे की है, जिसमें मरीज को अधिक दिन भर्ती रहना पड़ता है। इसके अलावा कई तरह की जांच की भी अभी किल्लत है।
जिला अस्पतालों में कायाकल्प के तहत काफी कार्य हुआ है। एनक्यूएएस से प्रमाणीकरण के लिए और कदम उठाए जा रहे हैं। यहां के जिला अस्पतालों की बात करें तो काफी बेहतर कार्य कर रहे हैं। प्रयास यही है कि चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाते हुए अच्छे अंक हासिल किए जाएं।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।