सहारनपुर। आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत बागवानों को निर्यात करने योग्य आम उत्पादित करने के लिए प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। जिसमें उद्यान विशेषज्ञ बागवानों को उच्च गुणवत्ता युक्त आम पैदा करने के टिप्स देंगे।
मंडी समिति परिसर स्थित मैंगो पैक हाउस से प्रसंस्कृत कर जनपद से आम का बडे़ पैमाने पर निर्यात किया जाता है। इसमें जिले के साथ ही महाराष्ट्र, कर्नाटक आदि का आम भी शामिल है। जिले में आम के बागों का रकबा करीब 25 हजार हेक्टेयर है। निर्यात में जनपद की भागेदारी बढ़ाने के लिए बेहतर क्वालिटी का आम पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है। यहां से दशहरी, लंगड़ा और चौसा आदि का निर्यात होता है। सबसे बड़ी समस्या आम में बारिश के समय लगने वाले फंगस से होती है। बरसात के बाद वातावरण में नमी के चलते आम में फंगस का प्रकोप बढ़ जाता है। इससे आम काला पड़ जाता है। जिससे निर्यातकों को निर्यात योग्य आम तलाश करने में परेशानी का सामना करना होता है। इसको देखते हुए उद्यान विभाग बागवानों को उच्च क्वालिटी का आम उत्पादित करने के लिए प्रशिक्षित करने पर फोकस कर रहा है।
बागवानों को भी मिलता है निर्यात पर अनुदान
आम के निर्यात करने पर निर्यातक के साथ ही बागवान को प्रदेश सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता है। आम को नवाब ब्रांड नाम से निर्यात किया जाता है। इसमें निर्यात को ब्रांड प्रमोशन के लिए 10 रुपये किलो और हवाई या समुद्री मार्ग से निर्यात करने पर 15 रुपये एवं सड़क से भेजने पर 7.50 रुपये प्रति किलो की दर से अनुदान मिलता है। बागवान को छह रुपये प्रति किलो की दर से अनुदान दिया जाता है।
बागवानों को उच्च गुणवत्ता वाले आम उत्पादित करने के लिए उद्यान विभाग प्रशिक्षण देगा। इसमें विशेषज्ञ बागवानों को आम की फसल को फंगस से लेकर कीटों तक से बचाने के टिप्स देंगे। साथ ही आम की बैगिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी। जिससे जनपद में निर्यात योग्य आम का उत्पादन बढ़ सके। - अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।