घर में बेटी नहीं, लक्ष्मी आई है, आज बहुत खुश हैं
सहारनपुर। डॉटर्स-डे पर जिला महिला अस्पताल में तीन बेटियों ने जन्म लिया। दादियां नवजात बच्चियों गोद में लिए दुलारती नजर आईं। खास बात यह है कि दादियां ग्रामीण परिवेश की रहीं, जो निरक्षर थीं। मगर आज बेटियों को लेकर उनकी भी सोच बदली है। उनकी खुशी का सबसे बड़ा कारण यही था कि जच्चा और बच्चा स्वस्थ हैं। प्रसव सामान्य तरीके से हुआ है। आज के दौर में बेटियों को लेकर क्या सोच है, इस पर माताओं और दादियों से बात की गई। पेश है रिपोर्ट।
महिला अस्पताल की नई बिल्डिंग के कक्ष में भर्ती खजूरी निवासी प्रियंका ने रविवार सुबह 6:30 बजे बेटी को जन्म दिया। प्रियंका के पास पहला बेटा है। प्रियंका बेटी को गोद में लिए बैठी हुई थी। प्रियंका से पूूछा गया कि बेटी के जन्म पर खुश हैं। तो उनका यही कहना था कि बेटा और बेटी घर में दोनों आ गए हैं और क्या चाहिए।
पुरानी बिल्डिंग में प्रथम तल पर भर्ती शिवपुर निवासी आशा ने रविवार तड़के 3:30 बजे बेटी को जन्म दिया। बच्ची को दादी केलती गोद में लिए बैठी थीं। केलती ने बताया कि आशा के पास पहले तीन बेटे हैं। यह पहली बेटी है, जिसे पाकर वह बेहद खुश हैं। उनका कहना था कि अब बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं रह गया है।
प्रथम तल पर ही भर्ती मुजफ्फराबाद निवासी अंजू ने शनिवार रात 12:30 बजे बेटी को जन्म दिया। यह अंजू का पहला बच्चा है, मगर बेटी के जन्म से वह बेहद खुश हैं। दादी प्रमिला पोती को गोद में लिए बैठी थीं। उन्होंने कहा कि उनके घर में बेटी नहीं लक्ष्मी आई है। मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं, यह सबसे खुशी की बात है।
बढ़ी है महिलाओं की साक्षरता दर
वर्ष 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक सहारनपुर जिले में एक हजार पुरुषों के सापेक्ष 887 महिलाएं थीं। 2001 की जनगणना में यह अनुपात 865 था। इन 10 सालों में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, पुरुषों की साक्षरता दर करीब 79.77 प्रतिशत रही तो महिलाओं की 63.30 थी। 2001 की जनगणना में महिलाओं की साक्षरता दर करीब 50 प्रतिशत थी।