सहारनपुर के अंबाला रोड बस अड्डे पर रक्षा बंधन पर बस में चढ़ती महिलाएं
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। रक्षा बंधन पर रोडवेज बसों में बहनों को मुफ्त सफर तो कराया गया, मगर रोडवेज बसें बहनों को दूसरे राज्यों तक नहीं छोड़ पाईं। बसों से उन्हें जिले के बार्डर तक छोड़ा गया। वहीं, निशुल्क यात्रा का मौका होने के बाद भी पिछले साल के मुकाबले सफर करने वाली बहनों की संख्या कम रही। कुछ यात्रियों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के डर से भी अधिकतर भाई-बहन अपने ही वाहनों से गंतव्यों के लिए पहुंचे। इनमें भी दोपहिया वाहन वाले ज्यादा रहे।
सोमवार को रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों में लखनऊ, सीतापुर या दूर के शहरों से ज्यादा जिले के ही गंगोह, नकुड़, छुटमलपुर, गागलहेड़ी सहित अन्य क्षेत्रों के यात्री शामिल रहे। इन क्षेत्रों में अपने मायके जा रही रज्जो, सुषमा, कल्पना, रामभतेरी आदि ने बताया कि पहले तो यही सुनने में आ रहा था कि लॉकडाउन आगे भी रहेगा। इसलिए त्योहार को लेकर आशंकित थे। मगर पहले राखी और मिठाई में छूट मिली और अब रोडवेज बसों में किराया माफ किया तो वे यहां सफर के लिए आ गईं।
रोडवेज के क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक जगदीश सिंह ने कहा कि रक्षा बंधन और बहनों को निशुल्क सफर की घोषणा से उम्मीद थी कि यात्री काफी बढ़ेंगे। कुछ मुसाफिर तो बढ़े हैं, मगर बसों में मुसाफिरों की संख्या अब भी कम ही रही। बहनें तक उतनी नहीं पहुंची जितनी उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने बताया उत्तराखंड, हरियाणा सहित अन्य राज्यों में बसों का संचालन न होने का भी असर नजर आया है।
रक्षा बंधन पर सुना पड़ा रहा रेलवे स्टेशन
हर बार रक्षा बंधन पर जहां ट्रेन में खिड़की तक पहुंचने के लिए भी मारामारी रहती थी। वहीं, इस बार इस पर्व पर रेलवे स्टेशन परिसर और प्लेटफार्म सूने से नजर आए। कोविड-19 वाली ट्रेनों को छोड़कर अन्य गाड़ियों का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया। इन ट्रेनों से जिले से हजारों की संख्या में यात्री बाहरी राज्यों के शहरों में पहुंचते थे। बाहरी राज्यों से यहां आते थे। वरिष्ठ रेलवे स्टेशन अधीक्षक कपिल शर्मा ने बताया कि नई नियमित ट्रेनों के बारे में अभी कोई निर्देश नहीं आए हैं।
सहारनपुर के अंबाला रोड बस अड्डे पर रक्षा बंधन पर बस में चढ़ती महिलाएं- फोटो : SAHARANPUR