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गन्ने की फसल पर बैंडिड क्लोरोसिस का हमला

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बीमारी से प्रसित गन्ने का पौधा - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। गन्ने की फसल में कई स्थानों पर बैंडिड क्लोरोसिस रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इस रोग के लक्षण गन्ने की सीओ 0238 प्रजाति में ही अधिक दिख रहे हैं। इसका असर शरद कालीन गन्ने की फसल में सर्वाधिक दिखाई पड़ रहा है। यह बीमारी अधिक ठंड में ज्यादा प्रभाव डालती हैं।
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जनपद में शरद कालीन गन्ने के कई खेतों में बैंडिड क्लोरोसिस रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। शरदकालीन गन्ना बुआई सितंबर से अक्तूबर माह में की जाती है। किसान इसके साथ सहफसली के तौर पर सरसों, मसूर, गेहूं, लहसुन आदि की फसल की जाती है। क्षेत्र में यह रोग पहली बार दिखाई दे रहा है। इसमें गन्ने के पौधे की पत्तियों पर पीले और लाल रंग के चकत्ते से हो जाते हैं। प्रभावित गन्ने का पौधा मुरझा जाता है जो बाद में सूखने लगता है। गन्ना विकास निरीक्षक डॉक्टर यशपाल सिंह ने बताया कि इस बार कुछ अधिक ठंड पड़ने से इस बीमारी के लक्षण कहीं कहीं दिखाई दे रहे हैं। ग्राम काजीपुर, अलीपुरा, बांसेपुर, मुबारकपुर आदि गांवों में बोए गए शरदकालीन गन्ने में इसका असर देखने को मिला है।
बताया कि इस पर कार्बेंडिजयम एवं मैंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर फसल पर छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। उप गन्ना आयुक्त डॉक्टर दिनेश्वर मिश्रा ने बताया कि इस रोग के बारे में उन्होंने गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों से बात की है और सभी ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षकों, गन्ना पर्यवेक्षकों एवं चीनी मिलों के अधिकारियों को किसानों को बैंडिड क्लोरोसिस रोग के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
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