सहारनपुर में पूर्वी यमुना नहर में सफाई कार्य के दौरान छठ पूजा की तैयारी करते कर्मी।
सहारनपुर। अंग्रेजों के जमाने की पूर्वी यमुना नहर की सफाई हो रही है। करीब 20 वर्षों के बाद नहर की सफाई का कार्य किया जा रहा है। जिले में नहर करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करती है। नहर की सफाई होने से किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी मिल सकेगा तो वहीं बाढ़ आदि का भी खतरा कम होगा।
अंग्रेजों ने वर्ष 1931 में हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी से नहर निकाली थी। जो सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद होते हुए दिल्ली तक जाती है। नहर की सफाई न होने से नदी के तल पर सिल्ट समेत अन्य गंदगी जमा हो जाती है। ऐसे में नदी में बहने वाले पानी का बहाव भी कम हो जाता है। इसका नुकसान अन्य जिलों शामली और बागपत को अधिक होता है। चूंकि वहां तक पानी का बहाव कम हो जाता है। इससे किसानों को अपने खेतों की सिंचाई करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन सभी को कारणों के देखते हुए जनपद के सिंचाई विभाग ने नहर की सफाई कराने का फैसला किया है। नहर की सफाई का कार्य शुरू करा दिया गया है। सफाई न होने के चलते नदी की क्षमता पर भी असर पड़ा है। पहले जहां इसकी क्षमता 44 क्यूसेक थी, जो अब घटकर दो हजार क्यूसेक रह गई है। नदी की सफाई हो जाने के बाद तीनों जिलों के लाखों के किसानों को इसका फायदा मिलेगा। सहारनपुर जिले में करीब 78 हजार हेक्टेयर भूमि पर नदी के जरिए सिंचाई की जाती है। इसी तरह शामली में करीब 42 हजार, बागपत में 55 हजार हेक्टेयर भूमि इसी पुर्वी यमुना नहर पर निर्भर है।
- छठ पर्व के लिए है खास इंतजाम
25 अक्तूबर से छठ पर्व शुरू हो जाएगा। 27 अक्तूबर को मुख्य पर्व है। इस दिन शाम के समय महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगी। इसके बाद 28 अक्तूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पर्व संपन्न होगा। नदी में पानी को रोकने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। दो तरफ दीवार बनाई गई है, जिसमें पानी रहेगा।
- करीब 20 वर्षों के बाद पूर्वी यमुना नहर की सफाई की जा रही है। काफी समय से नहर की सफाई न होने से नदी के तल पर सिल्ट जमा हो गई थी। इससे किसानों को भी सिंचाई में परेशानी आ रही थी। साथ ही नदी का बहाव भी कम हो गया था। कार्य को जल्द से जल्द पूरा करा लिया जाएगा। छठ पर्व के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं।
- मनीष बंसल, जिलाधिकारी