बारिश के बाद ढमोला में बढ़ा जलस्तर।
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सहारनपुर में जांच हुई, निरीक्षण हुआ, घर-घर जाकर नोटिस दिए गए, एफआईआर भी कराई गई। लेकिन सभी कार्रवाई ढाक के तीन पात साबित हुईं। न तो ढमोला नदी से अतिक्रमण हटवाया जा सका और न ही बाढ़ से सुरक्षा के कोई इंतजाम ही किए गए।
पहली बरिश में ही ढमोला नदी में चढ़े पानी ने किनारे बसी बस्तियों के लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। चार साल पहले नदी में आई बाढ़ की विभीषिका के बारे में सोचकर लोग सिहर उठते हैं।
बारिश शुरू होते ही ढमोला नदी किनारे बसे लोगों की धड़कनें बढ़ गईं हैं। ठीक चार साल पूर्व ढमोला नदी में आई बाढ़ ने बस्तियों को तबाह कर दिया था। भारी नुकसान उठाना पड़ा था यहां के लोगों को।
उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत ढमोला नदी के किनारे हुए अतिक्रमण को हटवाकर उसके किनारों को मजबूत करने के आदेश दिए थे। लेकिन आदेश सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गए।
इस विभीषिका के बाद ढमोला नदी पर और कब्जा होता चला गया। अधिकारी सिर्फ हवाई आदेश हर साल बारिश शुरू होने से पहले करते रहे। लेकिन कार्रवाई के नाम पर परिणाम सिफर ही रहा।
अमर उजाला ने अभियान चलाया तो प्रशासन ने अवैध कब्जों को चिह्नित किया। सूचीबद्ध कर उनको घर-घर जाकर नोटिस दिए गए। यहां तक कि लगभग दो सौ लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा दी गई।
लेकिन उसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई से हाथ खींच लिए। मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कभी त्यौहारों का तो कभी पुलिस बल न मिलने का, कभी चुनावों का बहाना बनाते गए।
नतीजन एक इंच भी ढमोला की जमीन खाली नहीं हो सकी। अब बारिश होते ही लोगों की सांसे अटक गईं हैं। ढमोला उफान की ओर बढ़ने लगी है। पांवधोई में पहली बारिश में ही पानी चढ़ चुका है। ऐसे में सहारनपुर फिर डूबा तो प्रशासन के पास बहाना भी नहीं होगा।