सहारनपुर। जिले में युवाओं के साथ किशोर और बच्चे भी नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। नशे की लत इतनी बढ़ गई है कि छोटे बच्चे भी करने से नहीं कतरा रहे हैं। अभिभावक जहां अपने खर्च में कटौती कर बच्चों के भविष्य के बारे में सोचते हैं, उन्हें बेहतर स्कूलों में पढ़ाते हैं, वहीं बच्चे उनके सपनों को धुएं में उड़ा रहे हैं। नशे की लत छुड़वाने के लिए जिला अस्पताल के नशा मुक्ति विभाग में हर 40 से 50 लोग आ रहे हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल में वर्ष 2021 में नशा मुक्ति केंद्र शुरू हुआ था। इसे एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर भी कहते हैं। नशा मुक्ति विभाग में आने वाले 50 लोगों में दस नए होते हैं। ओपीडी में 17 साल से कम उम्र वाले भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा 22 से 35 साल की उम्र वाले हैं। नशा मुक्ति केंद्र आठ बेड का है, जिसमें इस समय छह लोग भर्ती हैं।
शहर से लेकर देहात में कई चौक-चौराहों से लेकर हुक्का बार व चाय की दुकानों पर किशोर व युवा धुआं उड़ाते दिखाई दे जाएंगे, जो सिगरेट की आड़ में गांजा भरकर सुट्टा मारने से भी पीछे नहीं हट रहे। स्मैक, चरस और गांजा पीने वाले जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
-
ओपीडी में 15 वर्षीय बेटे को लेकर पहुंचे पिता ने बताया कि बच्चा अपने दोस्तों के साथ खेलने जाता था। पता नहीं कब नशे की लत लग गई। पूछने पर बताया कि दोस्तों ने कोल्ड डि्ंक कहकर शराब पिला दी थी।
- लाखों रुपये का कारोबार
शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में स्मैक, गांजा और चरस धड़ल्ले से बिक रहा है। नशे पदार्थों की बिक्री के लिए गंगोह, चिलकाना, नकुड़, मिर्जापुर आदि क्षेत्र बदनाम हैं। कोतवाली मंडी, देहात कोतवाली, शहर कोतवाली में भी नशीला पदार्थ बिक रहा। रोजाना लाखों रुपये के माल की खपत हो रही है।
नशा एक बीमारी है। अस्पताल के नशा मुक्ति विभाग में प्रतिदिन मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। नशे की लत छुड़ाने के लिए एटीएफ सेंटर है, जिसमें भर्ती करने की सुविधा है। - डॉ. सुधा कुमारी, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल